उत्तराखंड में नशे का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। इससे न पहाड़ी क्षेत्र अछूता है और न मैदानी। कल प्रकाशित एक रपट में श्रीनगर एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के दो छात्र भी ड्रग्स मामले में पुलिस के हत्थे चढ़े। दोनों छात्रों को उनके माता-पिता ने बड़ी उम्मीदों से यूनिवर्सिटी में पढ़ने भेजा था, लेकिन ये लड़के श्रीनगर आकर चरस बेचने लगे। यह स्थिति बताती है कि राज्य में नशे का कारोबार कहाँ तक पैर पसार चुका है। ऐसी ही एक खबर कुमाऊँ मण्डल के जिला अल्मोड़ा से पप्रकाश में आई है जहां कपड़ा व्यापारी और टैक्सी चालक नशे का करोबार कर रहे हैं।

कोरोनाकाल में मादक पदार्थों के साथ शराब तस्करी पर अंकुश को कप्तान पंकज भट्ट ने विशेष टीम गठित की है। ताकि महामारी में बाजार बंद होने पर युवा वर्ग सूखे नशे की गिरफ्त में न आ सके। शनिवार को पुलिस ने लोधिया बैरियर के पास अचानक दबिश दी। इस बाबत पुलिस ने हल्द्वानी की तरफ से आ रही कार UA 01- 6550 को रोककर तलाशी ली गई। जिसमे से कुल 20.40 ग्राम स्मैक बरामद की गई। इसमें दो लोग सवार थे,चालक निहाल सिद्दीकी पुत्र नदीम हुसैन निवासी कारखाना बाजार और जिशान अली पुत्र नजर अली बंसल गली, दोनों अल्मोड़ा नगर के रहने वाले हैं। पुलिस पूछताछ में जिशान की नगर में कपड़े की दुकान है। पुलिस के अनुसार दोनों बीते तीन चार वर्षों से मादक पदार्थ की तस्करी करते आ रहे। अल्मोड़ा में युवाओं को महंगे दामों पर नशे का कारोबार ही इनका असली व्यापार बन गया और दिखावे के लिए कपड़ा कारोबार किया करते थे।