व्यवस्थाओं में सुस्ती की वजह से नही हो पा रहा पहाड़ी क्षेत्र का विकास, अत्यधिक छेड़छाड़ को विकास का नाम देकर की गई अनदेखी ने खतरे में डाल दी लाखों जान ।

 

उत्तराखंड में जिन नदियों का जल स्तर एकदम से बढ़ जाता है उनमें से कुछ पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया गया था। नदी में किसी प्रकार की हलचल पर यह एक अलर्ट जारी कर जनहानि होने से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन आज अधिकांश अर्ली वार्निंग सिस्टम या तो बह गये हैं या काम ही नही करते हैं। समय पर सरकार को कभी इसकी उपयोगिता समझ नही आती इसलिए कई बार इसका खमियाजा जनता को भोगना पड़ता है। 

सरकार जब जागती है जब कोई दुर्घटना हो जाती है। रैणी आपदा को लगभग चार माह हो गये हैं। लेकिन रैणी गांव के लोगों के पुनर्वास को लेकर सरकार के पास कोई नीति नही है। भविष्य में इस प्रकार की आपदाओं से कैसा बचा जाय, इस पर भी कार्य तेजी से नही हो पा रहा है। रैणी गाँव आपदा के बाद सरकार को अर्ली वार्निंग सिस्टम की याद तो आई लेकिन योजना को क्रियान्वित करते करते कितना समय लगेगा किसी के पास कोई जवाब नही है।

सूत्रों के अनुसार अब अर्ली वार्निंग सिस्टम का कार्य केंद्रीय जल आयोग का हाथ थामा गया है। जल्द ही आयोग सर्वे की कसरत शुरू करेगा। फिर इसकी रिपोर्ट के आधार पर यह सिस्टम विकसित किए जाएगा। इस कार्य के लिए आपदा प्रबंधन और सिंचाई विभाग अपने एक-एक कर्मचारी को कार्य की रेख देख के लिए चयनित करेगा।