अपने आप को सर्वध्यानी व ज्ञानी समझने वाला रामदेव आयुर्वेद विज्ञान पर लगी वो दीमक है जिसने आयुर्वेद को पूर्ण रूप से बदनाम कर दिया है। जैसा कि हमने आपको कई बार बताया है कि रामदेव की पतंजलि के सभी उत्पाद उस देश में प्रतिबंधित है जिसकी जनसंख्या महज 22 लाख है। वर्ष 2017-18 में जब कतर देश ने रामदेव की उत्पादों की शुद्धता परखी तो पतंजलि का कोई भी उत्पाद मानकों पर खरा नही उतर पाया और कतर ने रामदेव के उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन दुर्भाग्य से भारत की जनसंख्या अधिक व बौद्धिक स्तर कम होने से पतंजलि के मिलावटी उत्पाद खूब बिक रहे हैं।

क्या आज से 10-12 साल पहले आपने अपने घरों में आने वाले वैद्यनाथ जैसी कम्पनी की दवाओं पर अंतिम तिथि (expiry date) देखी थी ? शायद नही या बहुत कम दवाओं के ऊपर अंतिम तिथि (expiry date)  होती थी। वजह ? दवाओं में पड़े अवयव (ingredient) पूर्ण रूप से शुद्ध होते थे। यदि आप किसी पेड़ की जड़, तने या पत्ते का पाउडर बनाकर एक हवा बन्द डिब्बे में रखे तो क्या वह खराब होगा ? शायद कम से कम चार या पांच साल से पहले तो नही। फिर रामदेव की लाल मेहंदी पर अंतिम तिथि (expiry date)  क्यों है ? क्योंकि मेहंदी के नाम पर आपको रंग व केमिकल बेच रहा है रामदेव। 

बदकिस्मती से भारत में सच बहुत कम दामों पर बिक जाता है और झूठ करोड़ो रुपया कमा लेता है। यही वजह है कि रामदेव ने आयुर्वेद उत्पादों पर अंतिम तिथि (expiry date)  लगाकर करोड़ो का कारोबार खड़ा कर दिया है। इस देश का दुर्भाग्य है कि पार्लेजी जैसी कम्पनी जो आज भी महज ₹03 में लोगों को बिस्किट खिला रही है को नकार दिया गया और रामदेव के मिलावटी बिस्किटों को मानक शुद्ध समझकर अपना लिया गया। आप लगातार एक माह तक रामदेव के पतंजलि निर्मित बिस्किट खाइये, आप देखेंगे कि एक ही माह में आपको पेट से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाएंगी। लेकिन रामदेव जनता है कि भारत के लोगों को गुमराह करना बहुत आसान काम है इसलिए कभी मैगी गलत हो जाती है, कभी कॉलगेट तो कभी एलोपैथ।

आध्यात्म या सन्यासी का मतलब क्या है ? क्या ऐसा आदमी जिसको जेड कैटेगरी (Z-Category) की सुरक्षा चाहिए हो, आध्यात्मिक/ सन्यासी कहलाया जा सकता है। केंद्र सरकार देश का पैसा फर्जी बाबाओं पर ऐसे ही बर्वाद करती रही तो आम जनता का हक तो मरना सुनिश्चित ही है। छह से आठ सुरक्षा कर्मी लेकर अगर एक बाबा बैठ जाएगा तो चल गया देश। सवाल ये है कि अगर रामदेव सब कुछ सही कर रहा है तो उसको जेड कैटेगरी (Z-Category) की सुरक्षा क्यों चाहिए ? क्या हिन्दू खतरे में है क्या मतलब यही है कि बाबा रामदेव खतरे में है ? या वोटों के चक्कर में वर्तमान केंद्र सरकार रामदेव को शरण दे रही है।

जिस आदमी ने प्राकृतिक अवयवों पर भी अंतिम तिथि (expiry date) छाप दी हो, वह भी सिर्फ इसलिए की करोबार को कई करोड़ बढ़ाना है। तो ऐसा व्यक्ति राष्ट्र हित में नही हो सकता, इस बात को समझना होगा। देश में अन्य कम्पनियां किस मानक पर उत्पाद बेच रही हैं इसका फैसला रामदेव नही कर सकता है। भारत सरकार में बाकायदा खाद्य सुरक्षा का पूरा मंत्रालय होता है उसका काम है कि वह उत्पादों की गुणवत्ता को देखे और उसके बाद ही देश में वितरण किया जाय। लेकिन बदकिस्मती से जनता द्वारा चुने गये ऐसे व्यक्ति को लोगों की कोई परवाह नही, ऐसे लोगों को सिर्फ वोट के वक्त ही मुद्दे उछालने की आदत हो गई है।