उत्तराखंड राज्य के सरकारी नौकरी धारकों और पेंशनरों के लिए शुरू की गई अटल आयुषमान योजना के तहत गोल्डन कार्ड सुविधा बन्द हो सकती है। उत्तराखंड में इस समय राज्य कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए सरकार ने कैशलेस उपचार के लिए गोल्डन कार्ड योजना शुरू की है। बीते दो माह में इस योजना का तकरीबन आठ हजार कर्मचारी लाभ ले चुके हैं। हालांकि, सचिवालय संघ समेत तमाम कर्मचारी संगठन इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि इस योजना में कई विसंगतियां हैं। इसमें मुफ्त ओपीडी सुविधा नहीं मिल रही है और अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग अस्पताल चिह्नित किए गए हैं। 

यह योजना शुरू से ही विवादित रही है क्योंकि पेंशन से हर माह पैसा चुकाने के बाद भी वृद्ध लोगों को उपचार के नाम पर ठगी जैसी महसूस हो रही थी। वजह, ओपीडी और दवाओं के लिए पैसा चुकाने जैसी समस्याएं। कर्मचारियों की मांग पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने एक संशोधन प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें इन खामियों को दूर करने के उपाय सुझाए गए थे। सोमवार को सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी से मुलाकात कर गोल्डन कार्ड की खामियों को दुरुस्त करने की मांग की। मुलाकात की जानकारी देते हुए संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने बताया कि सचिव स्वास्थ्य ने कहा है कि संघ की मांग पर विचार किया जा सकता है।

कर्मचारी संगठन का एक बड़ा हिस्सा इस योजना को बन्द करने की मांग कर रहा है। क्योंकि पैसा कटौती के बाद भी उनको स्वस्थ्य बीमा की 05 लाख वाली श्रेणी से बाहर रखा गया है। ऐसे में लोगो का कहना है कि हर माह वेतन कटौती से पैसा चुकाने के बाद उन्हें इस योजना का लाभ होता नजर नही आ रहा है। अब सरकार पर दबाव है कि या तो इस योजना में संशोधन करे या फिर योजना को बन्द करे। सूत्रों की माने तो सरकार योजना का पूर्ण लाभ निःशुल्क करना नही चाहती इसलिए उम्मीद है कि गोल्डन कार्ड योजना जल्द बन्द ही होगी।