बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री तीरथ रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए अहम निर्णय लिया गया। कैबिनेट मंत्री व भाजपा प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने बताया कि कैबिनेट में 14 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली व अन्य विभागों में पंजीकृत पर्यटन व अन्य इकाइयों को यह लाभ देने का निर्णय लिया है। लगभग 50,000 होटल, रिजोर्ट व ढाबों के स्टाफ को इससे फायदा होगा।  पर्यटन सेक्टरों से जुड़े सभी लोगों को यह राशि डीबीटी के जरिए दी जाएगी, जिस पर लगभग 28 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री राहत कोष से यह मदद देने का निर्णय लिया गया। 

आपको बता दें कि कोविड की पहली लहर में राज्यभर में 37,870 कर्मचारियों को यह राहत मिली थी। तब चिन्हीकरण में आई दिक्कतों के चलते अब सरकार ने चिन्हीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की है। होटल व पर्यटन इकाई के मालिक अपने-अपने कर्मचारियों का यह विवरण उपलब्ध कराएंगे। सभी जनपदों के जिला पर्यटन अधिकारी ऐसे कर्मचारियों की पुष्टि होने के बाद शासन से आर्थिक सहायता की मांग करेंगे। आपको बता दें, बुधवार को सरकार ने कहा कि होटल, रिजोर्ट व ढाबों के स्टाफ को पांच-पांच हजार रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि कारोबारियों को पंजीकरण व लाइसेंस नवीनीकरण में छूट दी है। इसके साथ ही टूर ऑपरेटर, एडवेंचर टूर ऑपरेटर, राफ्टिंग गाइड और यात्रा मार्ग के घोड़ा, खच्चर मालिक, कुली और रिक्शा चालकों को भी राहत दी है।

पर्यटन से जुड़े टूर आपरेटरों को भी दस-दस हजार रुपये देने पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है। प्रति फर्म के हिसाब से डीबीटी के जरिए यह भुगतान होगा। राज्य के 352 टूर आपरेटरों को इसका फायदा मिलेगा। इस पर लगभग 35 लाख से ज्यादा खर्च होने की उम्मीद है। पंजीकृत 303 एडवेंचर टूर आपरेटरों को भी यह मदद मिलेगी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना और दीनदयाल होम स्टे योजना के अंतर्गत जिन लोगों ने बैंकों से ऋण लिया है, उनके अप्रैल, मई जून का ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। इस पर लगभग दो करोड़ खर्चा आएगा।

राज्य में गंगा व अन्य नदियों में राफ्टिंग के कारोबार से जुड़े लोगों को भी दस-दस हजार की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राज्य में ऐसे 631 राफ्टिंग गाइड पंजीकृत हैं। इसी तरह राफ्टिंग, एयरोस्पोर्टस लाइसेंस नवीनीकरण में भी छूट दी गई है। इस पर लगभग 63 लाख का खर्चा आएगा।  जबकि यात्रा मार्ग और पर्यटन गंतव्यों पर चलने वाले घोड़ा, खच्चर मालिक, कुलियों, रिक्शा चालकों को भी मदद दी जाएगी। संबंधित क्षेत्रों के नगर निगम, पालिका, नगर पंचायत, जिला पंचायतों में जो पंजीकृत हैं, वे ही लाभ के दायरे में आएंगे।