नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर गेंद हरीश रावत के पाले में। समर्थकों के बीच ही चल रहा है गहन मंथन, खबर है कि इसी सप्ताह में नेता प्रतिपक्ष का चेहरा होगा साफ।

आज कल राज्य कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के चेहरे को लेकर मंथन चल रहा है। सूत्रों की माने तो इस सप्ताह में ही नेता प्रतिपक्ष की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। सब को विदित ही है कि राज्य में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद डा इंदिरा हृदयेश के निधन से रिक्त हुआ है। अब राजनीतिक गणितज्ञों का कहना है कि इस चयन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की भूमिका खास रहने वाली है। दरअसल राज्य में पार्टी करो या मरो की स्थिति से गुजर रही है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पार्टी नकारना नही चाहती है। गौरतलब है कि हरीश रावत को राजनीति का लम्बा अनुभव भी है, ऐसे में उनकी पसंद नापसंद पार्टी के लिए जरूरी हो जाती है।


सूत्रों की माने तो विधानमंडल में अधिकांश विधायक हरीश रावत के समर्थक हैं। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष को लेकर हरीश रावत समर्थकों में ही खींचतान चल रही है। हालांकि भविष्य की चुनावी रणनीति को देखते हुए हरीश रावत नेता प्रतिपक्ष पद के लिए हरिद्वार का प्रतिनिधित्व तय करना चाहते हैं, लेकिन उनके इस कदम से उनके समर्थकों के ही दो खेमों में बंटने का खतरा भी है। राज्य संगठन ने किसी भी बदलाव को लेकर तैयार रहने के संकेत दिए हैं। कुल मिलाकर सारा जिम्मा हरीश रावत के ऊपर है कि वह किसका चुनाव करतें है।

2022 विधानसभा चुनाव को देखते हुए हरीश रावत किसी को नाखुश नही करना चाहते हैं। इसलिए शायद ही हरिद्वार को नेता प्रतिपक्ष के लिए चुना जाय। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व पार्टी के वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल हरीश रावत के करीबी लोगों में से माने जाते हैं। आज कल पार्टी में इस नाम को लेकर भी काफी चर्चा है। खैर अब गेंद हरीश रावत के पाले में है और उनके समर्थकों की लंबी लिस्ट है, अब हरीश रावत किसको नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए उचित समझतें हैं ये कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।