पहाड़ो में लगातार बारिश से खतरे में पड़ा धारी देवी मंदिर।

 

पहाड़ो पर हो रही लगातार बारिश से नदियां उभान पर हैं। चौरास में स्थित डैम से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा बता रही है कि अगर इसी तरह से पानी बढ़ता रहा तो मैदानी इलाकों में भी नदी के आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। दरअसल अलकनंदा नदी चमोली जिले के सतोपन्त ग्लेशियर से निकलती है और मार्ग में पहले सरस्वती ( जो की देवताल से निकलती है और केशव प्रयाग में अलकनंदा से आ मिलती है) और फिर ऋषिगंगा (कामेत पर्वत से निकलती है और नीति क्षेत्र से निकलने वाली पश्चिमी धौलीगंगा, विष्णु प्रयाग से पहले अलकनंदा में आ मिलती है) को साथ लेकर आगे नन्दप्रयाग की तरफ बढ़ती है। आगे मार्ग में चार प्रयागों के साथ नदी श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र तक पहुंचती है। लेकिन माना जाता है कि अलकनंदा को सर्वाधिक प्रभावित सरस्वती और ऋषिगंगा ही करती हैं।

रैणी गाँव इन्ही में से एक ऋषिगंगा के किनारे बसने वाला पहाड़ी क्षेत्र है। नदी का जल स्तर बढ़ने से आवाजाही की दिक्कत इन गांव के लिए आम बात है। इस बार नदी फिर से उफान पर है और इसका असर श्रीनगर में स्थित डैम में जल के स्तर को देखकर साफ समझा जा सकता है। उधर नदी पर बना धारी देवी का मन्दिर भी स्तम्भों तक जलमग्न हो गया है। यही स्थिति लगातार रही तो स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर को क्षति हो सकती है। 

पहाड़ो पर नदी नालों के इस प्रकार के तांडव से लोग डरे हुए हैं। पहाड़ो से मिट्टी की पकड़ ढीली होने के कारण बड़े बड़े बोल्डर गिर रहे हैं। सड़क मार्ग जगह जगह बन्द पड़े हुए है। गढ़वाल से लेकर कुमाऊँ के पहाड़ी क्षेत्र की यही स्थिति है। शासन/प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नही दे रहा है कि दर्जनों ऐसे गांव जिनका सम्पर्क ही मुख्य सड़कों और बाजरों से कट गया है, इस आपदा का सामना कैसे करें ? इधर डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है जिससे अलकनंदा नदी में पानी का स्तर बढ़ गया है। देवप्रयाग में भागीरथी के इसमें मिल जाने से नदी और भी विक्राल रूप ले चुकी है। ऋषिकेश- हरिद्वार में भी नदी जल स्तर बढ़ गया है।