प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हुई। लेकिन सरकार के आंकड़ों में सभी मौत दर्ज नहीं हो रही थी। कुछ अस्पतालों के मौत देर से रिपोर्ट करने की जानकारी आने पर सचिव स्वास्थ्य ने आदेश किया कि अस्पताल मौत के आंकड़े राज्य नियंत्रण कक्ष को वक्त पर उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर सम्बंधित अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा और कार्रवाई की जाएगी।
 
इस आदेश को लगभग एक माह पूरा होने वाला है यही वजह है कि हर रोज अस्पतालों से  मौत के आंकड़े आ ही रहे हैं। सूत्रों की माने तो कोरोना की दूसरी लहर में अधिकारियों ने अपनी खाल बचाने के लिए मौत के असल आंकड़े पर पर्दा डाले रखा और अब एक से डेढ़ माह पहले हुई मौतों को रिकॉर्ड में दर्ज कर सरकार को भेजा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि अप्रैल शुरू में हुई मौत की जानकारी भी अब दी जा रही है। देहरादून के विभिन्न अस्पतालों में 40, हरिद्वार में 09 और पिथौरागढ़ के अस्पतालों ने 04 मरीजों की मौत की जानकारी अब जाकर दी है।

इस खबर के सामने आने के बाद सरकारी आंकड़े हर तरह से झूठे साबित हो गये है। राज्य में अब तक 6,664 से अधिक मौतों का आंकड़ा सरकार के पास है लेकिन हकीकत में ये आंकड़ा 10,000 को कबका पूरा कर चुका है। कोरोना की दूसरी लहर में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार आंकड़े छुपा रही है लेकिन अब जब सच सामने आया तो इसमें साफ साफ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ गई है। अब यह कार्य स्वास्थ्य विभाग ने खुद किया या सरकार के कहने पर, ये तो सरकार की कार्रवाई के बाद ही तय हो पायेगा।