मंगलवार को कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। हालांकि इसको किसी भी प्रकार की शर्त से बाहर रखा गया और स्वेच्छा पर छोड़ दिया गया है लेकिन आने वाले समय में लोन जैसी प्रक्रिया में इसकी अहम भूमिका बन जाएगी, ऐसे सूत्रों के हवाले से खबर है। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्ष 2016 से पूर्व के प्राधिकरणों एवं विनियमित क्षेत्रों को छोड़कर नए सम्मिलित ग्रामीण क्षेत्रों में यदि कोई आवेदक स्वेच्छा से नक्शा पास कराना चाहता है, तो संबंधित प्राधिकरण इसे स्वीकृत करने की कार्रवाई करेगा।

अलग राज्य बनने से पहले यहां मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण अस्तित्व में थे। राज्य गठन के बाद दूनघाटी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण, नैनीताल झील परिक्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण व गंगोत्री क्षेत्र विकास प्राधिकरण गठित किए गए। इसके साथ ही नगरीय व पर्यटक स्थलों के नियोजित विकास के लिए 22 विनियमित क्षेत्र अधिसूचित किए गए। इसके अलावा वर्ष 2016 में 19 नए स्थानीय विकास प्राधिकरण गठित किए गए, जिनमें कई क्षेत्रों को शामिल किया गया।

उस वक्त इसका जोरदार विरोध हुआ। क्योंकि इसको कर व्यवस्था से जोड़कर देखा जाने लगा। विधानसभा में सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायकों ने प्राधिकरणों में जनसामान्य के समक्ष आ रही कठिनाइयों को लेकर आवाज बुलंद की। उसके बाद इसपर एक कमेटी गठित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शे पास करने में आने वाली दिक्कतों ले चलते यह मामला आज भी अधर में लटका हुआ है। अब सरकार चाहती है कि जो लोग स्वेच्छा से अपने घरों के नक्शे पास करवाना चाहते हैं वह करवा लें। कुल मिलाकर यह भविष्य में सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों मकान कर जैसे करों के अंदर लाने का एक प्रयास है जिसके बाद बैंक आपको आसानी से लोन दे सकेंगे।