उत्तराखंड राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तर प्रदेश से अलग होने में कामयाब रहा लेकिन पृथक राज्य बनने के 20 वर्ष बाद भी सैकड़ो गांव उन्हीं परिस्थितियों के शिकार हैं जैसे कि राज्य निर्माण से पहले। आज जब की "मेरा गांव मेरी सड़क" जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं फलीभूत हैं, फिर भी अनेक गांव सड़क जैसी सुविधाओं के लिए देहरादून के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन सुनवाई फिर भी नही। वजह ? पहाड़ी लोग अपने सीधेपन की वजह से चुनावी बहकावे में आकर मतदान तो कर देते हैं लेकिन जीतकर जाने वाले फिर कभी देहरादून से ऊपर ही नही चढ़ते हैं।


लेकिन अब लोग जागरूक होने लगे है। संचार की त्वरित गति ने सूचनाओं का आदान प्रदान तेजी से बढ़ाया और आज हर दुर्गम से दुर्गम क्षेत्र का व्यक्ति भी जानता है कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य उसका मूलभूत अधिकार है। राज्य की सरकार "मेरी गांव मेरी सड़क" व "प्रधानमंत्री ग्राम सड़क" योजनाओं के बाबजूद भी ग्रामीण कक्षेत्रों को सड़क नही दे पा रही है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की जनता भली प्रकार से जानती है कि अगर नेता चाहे तो यह बहुत मुश्किल काम नही है। यही वजह है इस बार चमोली जिले के गोंख गांव ने 2022 में चुनाव बहिष्कार का फैसला लिया है।

एक फेसबुक यूजर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जोशीमठ-सुनील-गोंख मोटर मार्ग की कई वर्षों से मांग की जा रही है लेकिन शासन/प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। लोग आज भी स्वास्थ्य कारणों के लिए भी मीलों पैदल चल रहे हैं। हरीश चंद्र भट्ट नामक फेसबुक यूजर ने लिखा कि इस बाबत कई बार सड़क का सर्वे किया गया लेकिन फिर सब ठंडे बस्ते में चला जाता है। थक हार कर अब गांव के लोगों से सुनिश्चित किया है कि अगर सरकार इस ओर कोई पुख्ता कारवाई नही करती तो 2022 विधानसभा चुनाव का बहिष्कार होगा।