कुम्भ कोरोना जांच फर्जीवाड़े पर सरकार को बचाते नजर आए राज्य कृषि मंत्री, कहा फर्जीवाड़ा शासनादेश से पहले ही घटित हो चुका था।

कुम्भ मेले के दौरान कोरोना जांच फर्जीवाड़े को लेकर आए दिन मंत्री नई नई कहानियां जोड़ रहे हैं। जाँच कर्ता संगठन मैक्स कारपोरेट गिरफ्तारी से बचने ले लिए पहले ही कोर्ट के दरवाजे खटखटा चुका है। मतलब साफ है कि घोटाला बहुत बड़े स्तर का है। आइए समझने हैं कि यह घोटाला कैसे उजागर हुआ। दूसरी लहर में तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए सभी श्रद्धालुओं के लिए आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट लेकर आना अनिवार्य किया गया था। साथ ही हरिद्वार की सीमा पर भी कोरोना की आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच की व्यवस्था की गई। इसके लिए नौ लैब को अधिकृत किया गया था। इसमें मैक्स कारपोरेट  ने हिसार की नलवा लैब और दिल्ली की लालचंदानी लैब के जरिये ये काम किया। इन्होंने हरिद्वार के पांच स्थानों पर सैंपलिंग के लिए टेस्टिंग बूथ बनाए। 

इसी दौरान पंजाब से आए एक श्रद्धालू के पास बिना जांच के ही कोरोना का सन्देश मोबाइल पर प्राप्त हुआ। यह श्रद्धालू फरीदकोट का रहने वाला था। इस बात की सूचना इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) को दी गई। आइसीएमआर के पत्र पर स्वास्थ्य विभाग ने इसकी प्रारंभिक जांच कराई। इसमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई। इस पर सरकार के आदेश पर जिलाधिकारी हरिद्वार ने मैक्स कारपोरेट सर्विसेज के साथ ही हिसार (हरियाणा) की नलवा लैब और दिल्ली की लालचंदानी लैब पर मुकदमा दर्ज कर दिया। अब इसकी एसआइटी से जांच कराई जा रही है।

आपको बता दें कि इस मुद्दे पर पूर्व सीएम त्रिवेंद्र और वर्तमान सीएम तीरथ सिंह भी आमने सामने आ चुके हैं। और एक दूसरे पर बयानबाजी कर चुके हैं। अब पूरे मामले पर राज्य कृषि मंत्री और पार्टी प्रवक्ता सुबोध उनियाल की प्रतिक्रिया सामने आई है। सुबोध उनियाल ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा कुंभ की अधिसूचना लागू होने से पहले हुआ। साफ है कि कृषि मंत्री पार्टी की इज्जत बचाने का प्रयास कर रहें हैं। क्योंकि फर्जीवाड़ा हुआ तो उन्हीं की सरकार में है और इसमें कौन कौन शामिल है इसकी जांच से वर्तमान सरकार भाग बचती नजर आ रही है।