उत्तराखंड में कुछ दिन पहले सरकारी राशन में कंकड़ पत्थर की शिकायत मिली थी। लोगों का कहना था की प्रति 10 किलो अनाज के साथ लगभग 700 से 800 ग्राम कंकड़-पत्थर दिया जा रहा है। एक बार फिर से शिकायत प्रकाश में आई है और जनता का कहना है कि उनको सस्ते राशन के  नाम पर सड़ा गेहूं पकड़ाया जा रहा है। भारत नेपाल सीमा से लगे गांवों में सड़ा गेहूं पहुंच रहा है। ग्रामीणों में इसे लेकर जबरदस्त आक्रोश है। 

इस गांवों में बड़ी आबादी पीडीएस के राशन पर निर्भर है। इस माह के लिए आवंटित किए गेहूं की गुणवत्ता बेहद खराब है। सामाजिक कार्यकर्ता आन सिंह ने बताया कि गेहूं सड़ा हुआ है। आवंटित किए गए बोरों में गेहूं कम और कूड़ा ज्यादा है। जबकि आपूर्ति  विभाग का कहना है कि अभी तक खराब गेहूं की कोई शिकायत नहीं मिली थी। निरीक्षक को भेजकर गेहूं की गुणवत्ता देखी जाएगी। खराब गेहूं को वापस लिया जाएगा। 

ग्रामीणों ने इसे सीमांत क्षेत्र के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि सीमा क्षेत्र में आवंटित खराब गेहूं वापस लिया जाए और इसके स्थान पर नया गेहूं दिया जाए। क्षेत्र वासियों का कहना है कि अगर उनको सही गेहूं की आपूर्ति नही करवाई जाती है तो वे सम्बंधित विभाग के खिलाफ धरना देंगे।