बीते दिनों मुख्यमंत्री ने राज्य के एक पुल के निर्माण कार्य पर सवाल खड़े करते हुए 07 दिनों के भीतर उसकी गुणवत्ता जांच के आदेश दिए थे और रिपोर्ट तलब करने को कहा था।  लेकिन 14 दिन पूरे हो गये रिपोर्ट तो दूर की बात है शायद ही अभी जांच शुरू हुई हो। सवाल यह है कि राज्य में जब मुख्यमंत्री की ही नही चल रही है तो विकास कार्य कैसे सही मानकों के साथ पूरे होंगे। टनकपुर पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रहे चल्थी पुल की गुणवत्ता पर उठाए गए सवाल के बाद सीएम ने डीएम को सात दिन के भीतर जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा था। डीएम ने पीडब्लूडी की अध्यक्षता के साथ एक टीम का गठन कर जांच के आदेश भी दिए, लेकिन अभी तक इस पर कोई जवाब नही मिला है।

बीती 24 मई को जनपद दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह खामियों और लधिया नदी पर बन रहे चल्थी पुल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। गुणवत्ता से नाराज मुख्यमंत्री ने डीएम विनीत तोमर को जांच के आदेश दिए। डीएम विनीत तोमर 25 मई को तीन सदस्यीय तकनीकी समिति भी बनाई, लेकिन उस टीम ने अभी तक जांच शुरू ही नही की है।

अब जब इस बात को 14 दिन (दो गुना वक्त) हो चुके हैं तो तय समिति ले अध्यक्ष का जवाब है कि वह अभी अधिकारियों से सम्पर्क साध रहे हैं। डीएम ने 25 मई को लोक निर्माण विभाग के पिथौरागढ़ सर्किल के अधीक्षण अभियंता जेपी गुप्ता को इस समिति का अध्यक्ष व लोनिवि चम्पावत खंड के ईई एमसी पांडेय और ग्रामीण निर्माण विभाग के ईई केके जोशी को सदस्यता दी थी। अब सिर्फ कयासों का दौर चल रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद इन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।