कोरोना काल में निजी नौकरी और व्यापार करने वाले लोगों के प्रति सरकार का दोहरा रवैया समझ से बाहर है। सरकार की तरफ निजी नौकरी/व्यापार करने वालों के लिए न तो कोई आर्थिक मदद मिली और न ही उनको नौकरी या व्यापार में छूट। ऐसे में बड़ा सवाल है कि वह लोग अपनी आजीविका कैसे चलाए ? ऋषिकेश क्षेत्र के समस्त व्यापारिक संगठन पिछले कुछ दिनों से कोविड कर्फ्यू में व्यापारियों को राहत देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार की तरफ से किसी प्रकार की राहत की खबर नही है। बीते दिनों पुलिस ने एक निजी कोचिंग इंस्टीट्यूट चलने वाले अध्यापक को पकड़ लिया क्योंकि वह बच्चों को कर्फ्यू के दौरान भी पढा रहा था, ऐसे सवाल यही है कि अगर सरकार उचित कदम नही उठाती तो निजी नौकरी या व्यापारी वर्ग की आजीविका का क्या होगा।

2 जून, बुधवार को समस्त व्यापारिक संगठनों ने एकमत होकर त्रिवेणी घाट चौराहे पर थालिया और तालियां बजाई और उत्तराखंड सरकार की व्यापारी विरोधी नीतियों का विरोध किया। व्यापारिक संगठनों ने यह भी घोषणा की कि यदि सात तारीख को बाजार खोलने की अनुमति नहीं दी गई तो आठ तारीख को सभी व्यापारी अपनी दुकाने प्रातः सात बजे से दो बजे तक खोलेंगे।  संगठन नेताओं ने कहा कि सरकार की गाइड लाइन में छह तारीख को जनरल स्टोर खोलने की बात लिखी है। पिछले समय यह देखा गया की पुलिस जनरल स्टोर के नाम पर केवल परचून की दुकानों को ही खोलने दे रही है। इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल कोतवाली ऋषिकेश से मिलने जाएगा और अगली रणनीति के लिए बैठक में निर्णय लिया जाएगा।