उत्तराखंड में भू-अभिलेख दुरुस्त होने और संपत्तियों के झगड़े सुलझने के साथ ही संपत्ति कार्डधारक को उसकी संपत्ति पर ऋण की सुविधा मिल सकेगी। राजस्व और पंचायतीराज विभाग संयुक्त रूप से योजना को संचालित कर रहे हैं। परिसंपत्तियों का काम सर्वे आफ इंडिया कर रहा है। इसके लिए गांवों में ड्रोन के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण के लिए अब तक 3200 गांवों में ड्रोन फ्लाइंग का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में पौड़ी, हरिद्वार, देहरादून, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल स्वामित्व योजना में शामिल हैं। हालांकि, पूरे उत्तराखंड को ही इस योजना में शामिल कर चुकी है।

आज यानी मंगलवार को इसमें और तीन जिलों को शामिल किया गया है। इस योजना का नाम "स्वामित्व योजना" है जिसके तहत भूमि धारक को इसका ब्यौरा दिया जा रहा है साथ ही सरकारी रिकॉर्ड को भी दुरुस्त किया जा रहा है। मंगलवार को इस योजना में पिथौरागढ़, चंपावत और चमोली जिलों में भी गांवों का सर्वेक्षण प्रारंभ  किया जा रहा है।

राजस्व सचिव सुशील कुमार ने बताया कि कुल 5100 गांवों में ड्रोन फ्लाइंग का काम होना है। उन्होंने बताया कि नए शामिल किए जा रहे तीन जिलों में भी गांवों के सर्वे का काम आगामी जुलाई तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद शेष बचे दो जिलों अल्मोड़ा और टिहरी को भी योजना में शामिल कर सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस योजना के एक लाभ यह भी है कि वर्षों से चल रहे भूमि विवाद अब आपसी सहमति के साथ समाप्त किये जा सकेंगे।