कुम्भ प्रकरण में निष्पक्ष हो जाँच, दोषियों के खिलाफ हो सख्त करवाई, कॉग्रेस ने कहा खेल के तार केंद्र तक हो सकते है जुड़े।

वीरवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत गढ़ी कैंट में कोविड केयर अस्पताल का लोकार्पण करने थे। लोकार्पण के बाद से सीएम मीडिया से मुखातिब हुए तो मीडियाकर्मियों ने कुम्भ को लेकर सवाल पूछे। जवाब में सीएम तीरथ सिंह ने कहा कि कुम्भ का निर्णय मेरा नही था। मैने बतौर मुख्यमंत्री कार्यभार मार्च में ग्रहण किया और कुम्भ उससे पहले से चल रहा था। मैंने कुम्भ में हुई कोरोना की फर्जी जाँच को लेकर कमिटी बिठाई। मैं चाहता हूँ कि मामले की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाय।


बस सीएम तीरथ ने इतना क्या कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को बात कुछ हजम नही हुई। लगे हाथ उन्होंने भी बयान जारी कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह हत्या के प्रयास का मामला है। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूँ कि मामले की न्यायिक जांच करवाएं ताकि जनता  भी यह जान ले कि यह किस दौरान का मामला है। आखिर कब इस तरह के लाखों टेस्ट हुए और कब उन्हें नेगेटिव दिखा दिया गया। 

अपने बचाव में पूर्व सीएम ने वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह को कठघरे में खड़ा कर दिया है। त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि मुझे ऐसा ध्यान है कि कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे। इसमें टेंडर हमारे समय में नहीं हुआ। यदि टेंडर हुआ होगा तो मेला प्रबंधन के द्वारा हुआ होगा। नोटिफिकेशन हमारे समय में हुआ था, जो एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक का था। लेकिन अप्रैल मार्च के बाद ही आता है। इसलिए मैं भी चाहता हूँ कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीकों से हो।

पूरे मामले के प्रकाश में आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने भी चुटकी ली है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में बड़े लोगों के लिप्त होने की पूरी आशंका है। यह मामला केवल उत्तराखंड का ही नहीं है, हो सकता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके पांव फैले हों। वर्तमान व पूर्व मुख्यमंत्री के विरोधाभाषी बयानों से यह बात तो पुख्ता हो गई कि इस प्रकरण के तार कहीं ऊंची जगह जुड़े हैं। अब कांग्रेस कह रही है कि मामले में लीपापोती हुई तो विरोध में कांग्रेसी सड़कों पर होंगे।