फर्जी शिक्षकों के सहारे चल रही पहाड़ी जिलों की शिक्षा व्यवस्था, प्रदेश में 120 शिक्षकों के पास नही मिले उचित दस्तावेज। 


पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बाद उत्तराखंड में भी फर्जी शिक्षक जांच शुरू हुई तो पता चला प्रदेश में शिक्षक रूप में नौकरी कर रहे है कई "मुन्ना भाई"। शिक्षकों की जांच के लिए गठित एसआइटी सीआइडी के अपर पुलिस अधीक्षक सीआइडी के निर्देशन में कार्य कर रही है। एसआइटी अब तक राज्य में 80 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा चुकी है। लेकिन बड़ी खबर रुद्रप्रयाग जिले से आई है जहां 14 शिक्षक फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाकर पढा रहे थे। जिन शिक्षकों में खुद ही पात्रता नही ऐसे शिक्षक जब पहाड़ी क्षेत्र के जिलों में तैनात थे तो स्कूलों का बन्द होना स्वभाविक था।

दरअसल, प्रदेश में वर्ष 2012 से 2016 के बीच कई व्यक्तियों ने फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक की नौकरी हासिल की थी। इस बात का खुलासा करते हुए वर्ष 2016 में एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी, जिसके बाद पूरा मामला प्रकाश में आया और सरकार ने जांच के आदेश जारी कर दिए। वर्ष 2017 में सरकार ने जांच के लिए एसआइटी गठित की। अब तक एसआइटी की ओर से 120 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कारवाई करने के लिए महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को रपट भेजी जा चुकी हैं। जिनमें से 80 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।

इस मामले की जांच कर रहे देहरादून के अपर पुलिस अधीक्षक लोकजीत सिंह ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआइटी) ने ऐसे 25 शिक्षकों के खिलाफ कारवाई करने के लिए महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को रपट भेजी थी। बीती नौ जुलाई को इनमें से 14 के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की आदेश मिले थे। जिसके बाद सभी 14 आरोपियों के खिलाफ रुद्रप्रयाग जिले में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। सरकार की तरफ से अभी तक इन फर्जी शिक्षकों से रिकवरी के आदेश जारी नही किए गये हैं।