2022 में एक बार फिर मोदी नाम के सहारे पार पाना चाहती है प्रदेश भाजपा सरकार। अंदरखाने हार के भय से बैचेन हैं कई दिग्गज चेहरे-सूत्र ।

उत्तराखंड में 2022 में विधनसभा चुनाव होना है। लेकिन जगह जगह हो रहा भाजपा विरोध दर्शा रहा है  कि राह आसान नही है। दिसम्बर-जनवरी 2021 में केंद्रीय भाजपा ने पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत झोंक दी थी लेकिन फिर भी हार का मुह देखना पड़ा। हार के बाद अब तक प्राप्त खबरों के अनुसार लगभग 600 कार्यकर्ताओं की हिंसक झड़प में मौत भी हो चुकी है। मतलब पश्चिम बंगाल चुनाव भाजपा के लिए चारो तरफ से अशुभ रहा। ऐसे में पार्टी उत्तराखंड राज्य में हारना नहीं चाहती। लेकिन पिछले पांच सालों का रिपोर्ट कार्ड बता रहा है कि पार्टी अच्छी स्थिति में भी नही हैं। 


सूत्रों के अनुसार इस बात की खबर केंद्र में बैठे दिग्गज नेताओं को भी है कि पार्टी की स्थिति राज्य में बेहतर नहीं है। इस बीच सियासी नजरिये से परिस्थितियां बदली हैं। प्रदेश सरकार में दो बार नेतृत्व परिवर्तन हो चुका है, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को भी बदला गया है। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के कौशल की परीक्षा भी होनी है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि चुनाव के स्टार प्रचारक के रूप में पार्टी मोदी मैजिक के सहारे ही बैठी हुई है।

चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ा रही है। पार्टी ने फिलहाल दिसंबर तक के कार्यक्रम निर्धारित किए हैं। मुख्यमंत्री के साथ ही मंत्रियों, विधायकों और प्रदेश पदाधिकारियों के जिलों के प्रवास निर्धारित किए गए हैं। सूत्र बता रहें है कि प्रधानमंत्री समेत केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत अन्य नेताओं के उत्तराखंड में कार्यक्रम निर्धारित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि पीएम के कार्यक्रमों में भाजपा विरोधी लोगों के आने पर रोक सुनिश्चित की जाए।