ऊर्जा निगम के 3500 कर्मचारी हड़ताल पर, मांगे न मानने पर प्रदेश भाजपा को लग सकता है झटका। 2017 में किये गए फेरबदल के विरोध में हैं निगम कर्मचारी।

ऊर्जा निगम के कार्मिक पिछले 4 सालों से एसीपी की पुरानी व्यवस्था तथा उपनल के माध्यम से कार्य कार्योजित कार्मिकों के नियमितीकरण एवं समान कार्य हेतु समान वेतन को लेकर लगातार सरकार से वार्ता कर रहे हैं। 22 दिसंबर 2017 को कार्मिकों के संगठनों तथा सरकार के बीच द्विपक्षीय समझौता हुआ परंतु आज तक उस समझौते पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ऊर्जा निगम के कार्मिक इस बात से क्षुब्ध हैं कि सातवें वेतन आयोग में उनकी पुरानी चली आ रही 9-5-5 की एसीपी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो कि उन्हें उत्तर प्रदेश के समय से ही मिल रही थी। यही नहीं पे मैट्रिक्स में भी काफी छेड़खानी की गई। 


कर्मचारियों ने प्रदेश भाजपा पर मनमानी का आरोप लगते हुए अपनी मांगों के लिए आंदोलन शुरू किया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि उत्तराखंड की सरकार की न नीयत है और न ही कोई नीति है। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों का काम अंधेरें को खत्म कर रोशनी लाना है, लेकिन सरकार उनके जीवन में अंधेरा लाने की जिद पर अड़ी है। 40 साल से जो लाभ बिजली कर्मचारियों को मिलते आ रहे थे, वह 2017 के बाद से खत्म कर दिए गए। इस बाबत सोमवार को सुबह नौ बजे से ही जीएमएस रोड स्थित यूजेवीएनएल मुख्यालय पर बिजली कर्मचारियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह 11 बजे तक जीएमएस रोड पर सड़क के दोनों ओर प्रदेशभर से आए बिजलीकर्मियों के वाहन खड़े हो गए। मुख्यालय के गेट के बाहर बने पंडाल में सभी एकजुटता से बैठ गए।

कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को दोपहर पहले करीब चार घंटे तक सचिव ऊर्जा सौजन्या और निगमों के आला अधिकारियों से वार्ता भी की, लेकिन वार्ता विफल हो गई। इसके बाद मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया। यहां भी करीब चार घंटे तक वार्ता चली। वार्ता के बाद जहां शासन के अधिकारी हड़ताल न होने को लेकर आश्वस्त दिखे तो वहीं संयुक्त मोर्चा के तेवर तल्ख थे। मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक ने बताया कि वार्ता बेनतीजा रही। रात 12 बजे तक सरकार कोई सकारात्मक निर्णय न होने पर समस्त बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी। 

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कर्मचारियों के बीच उनकी हौसला अफजाई करने के लिए - "एक आंसू भी खतरा है हुकूमत के लिए, तुमने कभी देखा है आंखों का समंदर होना..." कहे तो पूरी सभा तालियों से गूंज उठी। दोपहर तीन बजे तक यूजेवीएनएल मुख्यालय पर सत्याग्रह करने के बाद बिजली कर्मचारी उत्साह के साथ यूपीसीएल मुख्यालय तक रैली लेकर पहुंचे। नारेबाजी करते हुए कई बिजली कर्मचारी मुख्यालय के भीतर घुस गए। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बाहर आने के लिए बोला तो वह नहीं माने। बाद में बिजलीकर्मियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्कामुक्की हुई।