शिक्षकों को यहां से वहां स्थानांतरित कर सरकार छीन रही युवाओं का रोजगार। उच्च शिक्षण संस्थानों समेत तकनीकी विद्यालयों में शिक्षकों के सैकड़ो पद रिक्त।


उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत के बड़े बड़े दावों के बाद उनके ही अधीनस्थ विभागों का ये हाल बता रहा है कि दावे और हकीकत मेल नही खा रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने पांच डिग्री कॉलेजों में  शिक्षकों के 75 पदों की कटौती कर दी है। इन पदों को दूसरे डिग्री कॉलेजों में समायोजित कर दिया है। सबसे अधिक संख्या एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी के 51 पद हैं। शासन ने भले ही तर्क दिया है कि जहां ज्यादा पद थे। विद्यार्थियों की संख्या कम थी। वहां से पदों को उन महाविद्यालयों में स्थानांतरित किया गया है, जहां छात्रों की संख्या अधिक है। जबकि, एमबीपीजी कॉलेज ऐसा महाविद्यालय है, जहां जरूरत से ज्यादा छात्र प्रवेश लेते हैं। सरकार नए पदों का भी सृजन कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

साफ है कि सरकार नए पदों पर भर्ती नही चाहती है। रोजगार के नाम पर 04 की जगह 01 शिक्षक काम कर रहा है और कहीं कहीं तो वह भी नही है। पहाड़ी जिलों में चल रहे पॉलीटेक्निक कॉलेजों को ही ले लीजिए, शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति चल रही है। श्रीनगर में ही सभी विषयों पर विषयाध्यापकों का भारी अभाव है लेकिन सरकार को शिक्षकों से यहां से वहां और वहां से कहीं और घुमाने में ही मझा आता है इसलिए रोजगार के नाम पर सिर्फ स्थांतरण ही सरकार को उत्तम विकल्प नजर आता है।

एमबीपीजी कॉलेज के कई विभागों स्थानांतरित किए गए पदों पर शिक्षक तैनात हैं। अब पद रिक्त होने के बाद शिक्षकों को किस तरीके से दूसरे महाविद्यालय में स्थानांतरित किया जाएगा। यह भी शासनादेश में स्पष्ट नहीं है। फिलहाल विभाग के लोगों को समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे होगा। शिक्षकों की कमी की बात होने के बाद ऐसे निर्णय से मामला पेचीदा हो गया है। इस पर निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. कुमकुम रौतेला का कहना है कि कई डिग्री कॉलेजों में पदों की कमी थी। हमने पहले नए पदों के सृजन के लिए प्रस्ताव भेजा था। शासन ने उन कॉलेजों से पदों को स्थानांतरित कर दिया है, जहां छात्रसंख्या कम है।