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उत्तराखंड में आये दिन कई तरह की बातें निकलकर आ रही हैं। भाजपा नेतृत्व परिवर्तन के बाद प्रदेश में राजनीतिक गुटबाजी की खबरें तेज हो गई हैं। हालांकि, गद्दावर छवि के नेता राष्ट्रीय पार्टी को छोड़कर छोटी पार्टियों में सम्मिलित हों, ऐसा होता प्रतीत नही होता। लेकिन, आम आदमी के प्रदेश प्रभारी का कहना है कि भाजपा की नीतियों से परेशान व नाराज नेता पार्टी के सम्पर्क में हैं। हो सकता है मोहनिया की बातों में कुछ दम हो लेकर इतना तो साफ है कि अनुभवी नेता आप में सम्मिलित नही होगा।

रविवार को धर्मपुर स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया ने कहा कि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन से भाजपा के अंदर जिस तरह का असंतोष चल रहा है। उससे भाजपा के कई विधायक आप के संपर्क हैं। पार्टी में शामिल होने वाले भाजपा विधायकों की संख्या बढ़ सकती है। जल्द ही पार्टी इसकी खबर सबको देगी। उन्होंने कहा कि 2022 में प्रदेश की सियासत में नए राजनीति समीकरण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार दावेदारी आप और बीजेपी के बीच ही है। लेकिन इस बयान को राजनीतिक गणितज्ञ बेबुनियादी बता रहें है क्योंकि गढ़वाल मण्डल में आम आदमी पार्टी एक से अधिक सीट लाने की स्थिति में नही है। हालांकि उस सीट को लेकर भी विवाद है लेकिन चेहरे की लोकप्रियता अधिक होने के कारण कुछ प्रतिशत तक माना जा रहा है कि गढ़वाल मण्डल में आप एक सीट निकाल लेगी।

दिनेश मोहनिया के बयान को राजनीतिक गलियारों में ज्यादा गम्भीरता से नही लिया जा रहा है। हो सकता है कि कोई छोटे कद का नेता या पार्टी कार्यकर्ता आप में सम्मिलित हो जाए। लेकिन सच यह है कि भाजपा के नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस को फायदा मिलने वाला है। इसका फायदा राज्य दल उक्रान्त को भी मिलता दिख रहा है। लेकिन गढ़वाल मण्डल में आम आदमी पार्टी को इससे कोई लाभ मिलता नजर नही आ रहा है। हालांकि, कुमाऊँ में पार्टी अच्छी स्थिति में नजर आ रही हो, लेकिन इतने से बहुमत का आंकड़ा छूना सम्भव नही है।