आखिरकार भाजपा के विधायक और दुष्कर्म के आरोपों में घिरे महेश नेगी मीडिया से मुखातिब हुए। हालांकि दुष्कर्म की बात के लिए उन्होंने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया लेकिन लगे हाथ कह भी दिया कि अगर डीएनए मैच होता है तो भरण पोषण करूंगा।

द्वारहाट से भाजपा विधायक महेश नेगी पर दुष्कर्म के आरोप लगने के बाद से ही डीएनए की मांग उठ रही थी। निचली अदालत के डीएनए की जांच के आदेश के बाद महेश नेगी बहाने बनाकर बचते नजर आए। इस बीच शोषित महिला के द्वारा बताए गये ठिकानों पर उत्तराखंड पुलिस दबिश देती रही और जांच में हर जगह महेश नेगी महिला के साथ मौजूद थे, ऐसे प्रमाण मिले। लेकिन डीएनए से बचने के लिए महेश नेगी ने नैनीताल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फिर शुरू हुआ शिलशिला, तारीक पे तारीक.......


अब चूंकि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है। कमान भी कुमाऊँ के युवा नेता के हाथ में आ गई है इसलिए शुक्रवार को द्वारहाट भाजपा विधायक महेश नेगी मीडिया से मुखातिब हुए। अपने ऊपर लगे आरोपो के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हुए महेश नेगी ने कहा, मैं कोर्ट का सम्मान करता हूं। डीएनए टेस्ट को भी तैयार हूं। मेरे ऊपर दुष्कर्म का मुकदमा है। विरोधियों को लग रहा है कि मुद्दा उनके हाथ से निकल रहा है तो अब डीएनए की मांग करने लगे हैं।

विधायक जी यह भूल गए हैं कि डीएनए जांच का आदेश कांग्रेस ने नहीं निचली अदालत ने दिया था। कांग्रेस भ्रष्ट सरकार थी/है यहां तक तो सही है क्योंकि राजनीति के कई पहलू होते हैं जो आम जनता उतना ही जानती है जितना नेता एक दूसरे के बारे में बताते हैं। लेकिन दुष्कर्म के लिए भी कांग्रेस ही जिम्मेदार है,ये तो समझ से परे हो गया विधायक जी। और फिर आपने ये भी मान लिया कि अगर डीएनए जांच सच साबित होती है तो भरण पोषण देंगे। जब आपने कुछ किया ही नही तो जांच में डीएनए मेल कैसे हो सकता है?

खैर सच तो राज्य का बच्चा बच्चा भी जानता है और आप भी। अगर कुछ होता नही तो आज तक तारीक-तारीक थोड़े खेल रहे होते। लेकिन मामले में देरी होने से न्याय व्यवस्था सवालों के कठघरे में जरूर आ गई है। समाज में इसका गलत सन्देश जाएगा। राज्य में बढ़ रहे यौन अपराध के लिए कहीं न कहीं कानून की इस प्रकार की लाचारी भी वजह है। प्रजा वही आचरण करने लगती है जैसा की सत्ता में बैठा ऐसा चेहरा जिसको जनता ने जनहित के लिए चुनकर भेजा होता है। महेश नेगी केस में पीड़िता द्वारा बताई गई हर बात सच साबित हुई सिवाय डीएनए टेस्ट के। क्योंकि डीएनए के लिए विधायक आनाकानी कर रहें है, इसलिए सच का पता नही चल पा रहा है। स्पष्टता के बाद भी इतना समय लगने की वजह से न्याय व्यवस्था पर संदेह होना लाजमी भी है। 

अब चुनाव नजदीक है, इसलिए विधायक को चुनाव की चिंताएं बढ़ गई हैं। यही वजह के एक लम्बे समय के बाद महेश नेगी मीडिया के आगे मुखातिब हुए। लेकिन इस दौरान कानून व्यवस्था सत्ता के आगे बौनी नजर आई। अब देखना दिलचस्प होगा कि अगर आरोप सही साबित होता है तो क्या भाजपा विधायक को टिकट देगी ? अगर टिकट मिलता है तो कई बातें साफ हो जाएंगी, जिन पर राज्य के मतदाताओं का ध्यान जरूर जाएगा।