लगता है अरविंद केजरीवाल भाजपा की मुफ्त बिजली की घोषणा का जवाब देने आए थे, विकास मुद्दों की भारी कमी आई नजर। जिन घोषणाओं की उम्मीद, खरे नहीं उतर पाए केजरीवाल।

उत्तराखंड दौरे पर आए अरविंद केजरीवाल से युवाओं को बड़ी उम्मीद थी कि राज्य में इंडस्ट्री के बढ़ावे को लेकर कोई बात होगी, युवाओं के रोजगार और महंगाई के मुद्दे पर कोई बात होगी। उम्मीद थी कि पहाड़ो के विकास के लिए कर्नल अजय कोठियाल के नेतृत्व में कोई रोडमैप तैयार किया गया होगा। लेकिन, केजरीवाल केवल बिजली को ही आधार बनाकर चार घोषणाएं करके लौट गये। हालांकि यह भी एक सकारात्मक कदम है लेकिन केवल इतने से विकास हो जाएगा, यह भौगोलिक चुनौतियों वाले इस राज्य के लागू नही होता दिखता।


उम्मीद थी कि पहाड़ी क्षेत्र की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किसी प्रकार की दूर दृष्टि के साथ केजरीवाल उत्तराखंड आए होंगे, लेकिन ऐसा नही हुआ। वर्तमान सरकार पर कटाक्ष करते हुए केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी के पास मुख्यमंत्री बनने लायक कोई चेहरा नही है इसलिए तीन-तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े। केजरीवाल के पास जनता को अपनी तरफ लुभाने के लिए कुछ खास नजर नही आया। राज्य में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी अगर यह सोच रही है कि मुफ्त बिजली के नाम पर सरकार बन जाएगी तो यह प्रयास सार्थक नही होगा।

बीजेपी से जो लोग आज नाराज हैं उसकी वजह है कि सरकार के पास नीतियों के नाम पर कुछ नही है। केजरीवाल को यह बात समझनी होगी कि दिल्ली और उत्तराखंड की सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियां कहीं भी मेल नही खाती हैं। यहां सरकार उसी की बनेगी जो पहाड़ी जिलों के विकास के लिए मुद्दे खड़े करने में सक्षम होगा। आम आदमी पार्टी को शायद यह बात पता नहीं है कि पहाड़ी जिलों में बिजली की दरें शहर की तुलना में लगभग आधी हैं। ऐसे में सिर्फ बिजली को आधार बनाकर घोषणा करना कुमाऊँ जैसे खेती वाले कुछ क्षेत्रों को तो फायदे का शौदा लग सकता है लेकिन गढ़वाल में इससे कोई फायदा होने वाला नही है।

उम्मीद थी कि कर्नल कोठियाल जैसे चेहरे के बाद आम आदमी पार्टी पहाड़ी क्षेत्र की समस्याओं को बारीकी से पकड़ पाएगी लेकिन अब लग रहा है कि पार्टी उत्तराखंड की राजनीति को पकड़ने में गलती कर रही है। राज्य में सिर्फ दो तरीकों से वोट लिया जा सकता है। पहला वोटर खरीद लो और दूसरा विकास के सही वर्गीकरण के साथ आगे बढ़ो। अब पहाड़ी जिलों में पिछले 20 सालों में क्या विकास हुआ और किसने राज किया उससे साफ हो जाता है कि वोटर किस श्रेणी का है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल जो झुनझुना बजा रहें है, उससे सरकार नही बनने वाली है।