2022 में भाजपा को देखनी पड़ सकती है हार, कई गलत नीतियों से लोगों में खासी नाराजगी। 2022 विधानसभा में उठेंगे स्थानीय मुद्दे, नही चलेगा मोदी मैजिक ।

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी में भय बना हुआ है। पार्टी को समझ आने लगा है कि उनकी नीतियों के कारण 2022 में सत्ता हाथ से जा भी सकती है। यही वजह है कि तीरथ सिंह रावत को अचानक दिल्ली बुलाया गया। सूत्रों से पता चला है कि 2022 विधानसभा चुनाव प्रचार स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ही करेंगे। क्योंकि राज्य सरकार की नीतियों से कुमाऊँ क्षेत्र में बेहद मायूसी है जबकि गढ़वाल में पौड़ी जिले को छोड़कर अधिकांश में लोग पार्टी की नीतियों से बेहद परेशान हैं। रोजगार पर पार्टी पूरी तरह से फेल नजर आई। सिर्फ विज्ञप्ति निकाली गई और कुछ पर परीक्षाएं करवाई गई। परीक्षा परिणाम के बाद भी युवाओं को जॉइनिंग नहीं मिलने से लोग नाराज हैं। 


इधर महंगाई भी आसमान छूँ रही है। पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से किराए में हुई बढोत्तरी से लोग परेशान हैं। खाने का तेल पिछले चार सालों में दोगुने से अधिक दाम पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी वर्तमान सरकार में कोई इजाफा नही हुआ, खासकर पहाड़ी क्षेत्र में। ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल इंडिया का झूठा सपना दिखाया गया जबकि मनरेगा की डिजिटल पेमेंट करने में सरकार नेटवर्क/सर्वर का न होना, हवाला देते हुए नजर आई। सबसे बड़ी बात की भ्रष्टाचार दिन दुगनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है और प्रदेश सरकार फिर भी कह रही है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार नही है।

इन सब के बाद रही हुई कसर देवस्थानम बोर्ड ने पूरी कर दी है। अब सूत्रों से खबर आ रही है कि 2022 विधानसभा के मध्यनजर देवस्थानम बोर्ड पर केंद्र सरकार रोक लगा सकती है। क्योंकि अगर ऐसा नही किया तो भाजपा को करारी हार देखनी पड़ सकती है। राज्य में एक बार फिर से झूठे वादों का दौर शुरू होने वाला है लेकिन इस बार लोग मन बना चुके हैं क्योंकि डबल इंजन अगर ऐसा होता है तो इससे भला तो सिंगल इंजन ही सही था। कम से कम बेरोजगार युवाओं को सरकारी फॉर्म भरने के पैसे तो नहीं चुकाने पड़ते थे। खाद्य पदार्थ की कीमतें इतनी ऊपर तो नही थी। 

अब भाजपा युवा मतदाओं को लुभाने के लिए नई नई विज्ञप्तियां निकाल रही है। लेकिन आज से पहले सरकार सोई हुई थी। चुनाव नजदीक आते ही दोगली नीतियां शुरू कर दी गई। विज्ञप्ति निकाल रही है लेकिन कोचिंग इंस्टीट्यूटस पर प्रतिबंध सक्रिय है। ऐसे में युवा पढ़ाई कैसे करें ? मतलब साफ है इन पदों पर परीक्षा होते होते 2022 निकल ही जाएगा उसके बाद अगर सत्ता में रहे तो फिर मनमानी नही रहे तो इसका ठीकरा विपक्ष के ऊपर। कुल मिलाकर इस बार 2022 में मतदान मोदी के नाम पर पढालिखा युवा तो नही करेगा। इसलिए भाजपा के लिए 2022 विधानसभा चुनाव आसान नजर नही आता। ये बात अब भाजपा के दिल्ली में बैठे लोग समझने लगे हैं इसलिए औचक बैठक की जा रही हैं।