भाजपा ने एक कदम बढ़कर दोहराया पार्टी का इतिहास। 2007 में भी हुआ था तीन बार शपथ समारोह, बस तब मुख्यमंत्री बदलने में एक कसर बाकी रह गई थी।

उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाबजूद तीन-तीन बार मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। यह घटना इतिहास में दर्ज करने योग्य है, कम से कम उत्तराखंड के इतिहास में तो बेहद जरूरी है। गनीमत यह है कि यह पांच बार होने से बच गया। यह पहली बार नही हुआ, इससे पहले भी राज्य भाजपा यह रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी है। वर्ष 2007 में जब भाजपा सरकार बनी थी, तब भी पांच साल के कार्यकाल के दौरान सरकार में दो बार नेतृत्व परिवर्तन हुआ। उस समय भी तीन बार शपथ ग्रहण समारोह हुए।  


आपको बता दें कि वर्ष 2007 में भुवन चंद्र खंडूड़ी और रमेश पोखरियाल निशंक की मुख्यमंत्री के पद पर अदला-बदली हुई थी। एक दशक में भाजपा ने फिर वही कहानी दोहराई लेकिन इस बार नया रिकॉर्ड बनाया। इस बार मुख्यमंत्री के तीन चेहरे अदला बदली हुए। पहले चरण में त्रिवेंद्र व तीरथ सिंह की अदला बदली हुई और दूसरे चरण में महज 114 में तीरथ व पुष्कर सिंह धामी की अदला बदली हुई। इस फेर बदल में पहले कैबिनेट में सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडेय, डा धन सिंह रावत व रेखा आर्य ने तीसरी बार शपथ ली और दूसरी बार में बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल, गणेश जोशी व स्वामी यतीश्वरानंद ने  शपथ ली ।

इन सब के बीच बंशीधर भगत का एक बयान लोगों के दिलों में घर कर गया। उन्होंने कहा कि हम चाहे 10 मुख्यमंत्री बदले इससे जनता को क्या ? हाँ, सही कहा मंत्री जी ने, जनता का पैसा  मुख्यमंत्री का चेहरा बैनरों पर छापने के लिए भाजपा के नेता अपने वेतन में से कटौती करते हैं या कुछ कुछ मंत्री तो 24-24 घण्टे काम करते हैं। राज्य का विकास चिल्ला चिल्ला के कह रहा है कि बस करो बहुत हुआ नेता जी विकास अब टेबल सजा कर आराम करो।