बद्रीनाथ में सतपाल महाराज मुर्दाबाद तो गंगोत्री में जला पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का पुतला, देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों में भारी आक्रोश।

 

चारधाम मंन्दिर की पौराणिक परम्पराओं से छेड़खानी को लेकर तीर्थ पुरोहितों में भारी आक्रोश है। सरकार ने मंदिरों को सरकारी कमाई का अड्डा मानकर मनमाने तरीके से देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया। इसके विरोध में तीर्थ पुरोहित शुरू से अब तक कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन सरकार भी अपने निर्णय पर अड़ी हुई है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी तीर्थ पुरोहितों ने प्रदर्शन कर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंका। तीर्थ पुरोहित पूर्व सीएम के बयान से नाराज हैं।

आपको बता दें कि तीर्थ पुरोहित बद्रीनाथ धाम में गर्भगृह से आरती के लाइव प्रसारण के प्रस्ताव पर भड़के हुए हैं। शुक्रवार को तीर्थ पुरोहितों ने धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज के खिलाफ जमकर नारे लगाए। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि परंपरा से खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को बदरीनाथ धाम में हक हकूकधारियों और तीर्थ पुरोहित समाज की बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद साकेत तिराहे पर प्रदर्शन के बाद ब्रहमकपाल तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष उमेश सती ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मांगों को लेकर ज्ञापन भेजा गया है। 

आपको बता दें कि एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहित कांग्रेसी मानसिकता के हैं।  जिससे नाराज तीर्थ पुरोहितों ने त्रिवेंद्र सिंह रावत का पुतला फूंका। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी तीर्थ पुरोहितों का आंदोलन जारी है। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने त्रिवेंद्र के बयान की निंदा करते हुए कहा कि देवस्थानम बोर्ड अगर रद नहीं किया जाता है तो 23 जुलाई को आंदलोन और उग्र होगा।