पानी की शुद्धता के नाम पर डाला जा रहा क्लोरीन, कम उम्र के युवाओं में अनेक रोगों का बना कारण। आखिर कब जागेगी सरकार, क्या यूं ही अनदेखी से दूर रहेंगे उचित मानक।

देहरादून में घरों तक पहुंचने वाले पीने के पानी को लेकर सोसायटी आफ पोल्यूशन एंड एनवायरमेंट कंजर्वेशन साइंटिस्ट (स्पैक्स) की सालाना सर्वे रिपोर्ट ने चौकाने वाला खुलासा किया है। आम जनता से लेकर कई मंत्रियों के घरों तक जाने वाला पानी इतना घातक है कि उससे शरीर में कई तरह के विकार पैदा हो सकतें हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पानी कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, विधायक खजान दास, महापौर सुनिल उनियाल गामा, जिलाधिकारी, एसएसपी समेत शहर के कई प्रमुख व्यक्तियों के घरों तक जाता है।  


पत्रकारों से वार्ता में शुक्रवार को प्रेस क्लब में स्पैक्स के सचिव डा. बृजमोहन शर्मा ने बताया कि इस साल उनकी संस्था ने जन-जन को शुद्ध जल अभियान के तहत देहरादून में 125 स्थानों से पेयजल के 125 नमूने एकत्रित किए, जिनमें 94 फीसद नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।अधिक क्लोरीन ,फीकल कालीफार्म इत्यादि के कारण पानी पीने लायक नहीं है। डा. बृजमोहन शर्मा के अनुसार दून में पानी कठोर है। लेकिन इसकी गुणवत्ता सुधार के लिए कोई काम नहीं हो रहा। उनकी संस्था 1990 से पेयजल की गुणवत्ता पर काम कर रही है। हर साल जल संस्थान, जिला प्रशासन, पेयजल मंत्री समेत अन्य जिम्मेदार लोग को वह अपनी सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध करवाते हैं। बाबजूद इसके सरकार इस ओर कोई कार्य नही कर रही है।  

इस बार आम जनता के साथ साथ कुछ मंत्रियों के घरों से भी पानी के सेम्पल लिए गये थे। मंत्री, विधायक और अधिकारियों के घर में पहुंच रहे पानी में क्लोरीन पांच से सात गुना अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार 125 नमूनों में से मात्र सात स्थानों पर ही क्लोरीन की मात्रा मानकों के अनुरूप थी, छह स्थानों पर क्लोरीन मानकों से सात गुना ज्यादा था, 53 स्थानों में क्लोरीन मानक से तीन गुना ज्यादा था, 49 स्थानों में क्लोरीन था ही नहीं। डा. बृजमोहन शर्मा के अनुसार पीने के पानी में फीकल कालीफार्म बिल्कुल नहीं होना चाहिए। लेकिन जांच में फीकल कालीफार्म भी कई जगह पाया गया।

सवाल यह है कि जब कोई संस्था 1990 से पेयजल की गुणवत्ता पर काम कर रही है, तो आज तक सरकार क्या कर रही है। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए बस जमकर क्लोरीन मिलाया जा रहा है, जो कि सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। इसी का परिणाम है कि आजकल कम उम्र के बच्चों के बाल सफेद हो रहें है, पथरी की समस्याएं बढ़ रही हैं, लीवर, किडनी, आंखे, हड्डी के जोड़ और पाचन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।