मतदाताओं का मिजाज देखकर कर सकतें हैं बागी नेता घर वापसी, लगातार कमजोर नेतृत्व से दबंग नेताओं की छवि पर हो रहा गलत असर।

उत्तराखंड में राजनीतिक उथलपुथल के बीच मतदाता बेहद नाखुश नजर आ रहा है। डबल इंजन होने के बाद भी राज्य में विकास की रफ्तार बहुत धीमी है। केंद्रीय प्रोजेक्टों पर सरकार ने सही से ध्यान केंद्रित नही किया जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है। बात चाहे आल वेदर सड़क परियोजना की हो, रेल परियोजना की हो या फिर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की हो। आल वेदर और रेल प्रोजेक्ट को लेकर "पहाड़ समीक्षा" ई समाचार पहले ही कई बिंदुओं पर लेख प्रकाशित कर चुका है। लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर चल रहे कार्य को लेकर भी हैरान करने वाली बातें प्रकाश में आ रही हैं।

 

दो दिन पहले हुई हल्की सी बारिश में पलटन बाजार की दुकानों में पानी घुसने की खबरें सामने आई। दरअसल, पलटन बाजार की सड़क व नालियों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सही किया गया है। लेकिन शुक्रवार को हुई महज एक से दो घण्टे की बारिश में ही इन नालियों से पानी बाहर आकर दुकानों में घुस गया। सवाल यह है कि जब इन नालियों में दो घण्टे की बरसात का पानी सुचारू रूप से प्रवाह करने की क्षमता नही है तो ऐसे कार्य को स्मार्ट सिटी का नाम कैसे दिया जाय ? या स्मार्ट सिटी के नाम पर महज खानापूर्ति कर रही है सरकार। बिना प्लानिंग का बसा हुआ शहर देहरादून अपने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट की तरफ बड़ी उम्मीदों से ताक रहा है, लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है राज्य तंत्र उसमें भी भ्रष्टाचार झांक रहा है।


प्रदेश में सशक्त नेतृत्व की कमी में भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। ऐसा नही है कि कांग्रेस के समय में भ्रष्टाचार नही था, लेकिन कार्य क्रियान्वयन इतना गड़बड़ाया हुआ नही था जितना की वर्तमान सरकार में है। लगात मिल रहे कमजोर नेतृत्व से अब बागी नेता भी परेशान हैं, ऐसा सूत्रों का कहना है। भाजपा में अधिकांश नेता जिस चाह से शामिल हुए थे, उनको वह सब नही मिला। ऊपर से केंद्रीय दखल अंदाजी से नेताओं की स्वतंत्रता पर असर पड़ा है। गौरतलब है कि राज्य का अपना एक अलग अधिकार क्षेत्र होता है अगर वह केंद्र शासित न हो। लेकिन जिन भी राज्यों में भाजपा की डबल इंजन सरकार है वहां केंद्र का दखल उसी प्रकार है जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में होता है, इससे दबंग छवि के नेता परेशान है।


2022 विधानसभा चुनाव पास हैं और राजनीतिक समीकरण बड़ी तेजी से बदल रहें है। राज्य का युवा मतदाता पूर्व से ही तीन खेमों में बंट चुका है। ऐसे में कुछ ऐसे चेहरे हैं जिनका अपने क्षेत्र पर अपने बलबूते अच्छी पकड़ है। ऐसे नेताओं के लिए पार्टी से ज्यादा उनके खुद की चेहरे की पहचान है। अब अगर राजनीतिक समीकरण वर्तमान सरकार के साथ सही नही बैठते तो अटकलें लगाई जा रही है कि बागी नेता घर वापसी कर सकतें है।