काल्पनिक चित्र: नेपाल से नाबालिग लड़कियों से भारत मे हो रहे देहव्यापार और बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए सरकारों को कदम उठाने की आवश्यकता।

नेपाल अपने कुकर्मों के लिए पूरी दुनियां में बदनाम होता जा रहा है। पड़ोसी देश भारत में देहव्यापार को बढ़ावा देने में भी नेपाल की बड़ी भूमिका। देहव्यापार में लिप्त लोग नेपाल से ही लड़कियों और औरतों को भारत में लेकर आते हैं और उनसे देहव्यापार करवातें है। यही नही, कई लोग पैसों के लालच में आकर नेपाल से नाबालिग लड़कियों को लाकर भारत में बेच देतें हैं। क्योंकि नेपाल की सीमा भारत में कई राज्यों को टच करती है इसलिए इस अपराध में लिप्त लोग अलग अलग रास्तों का उपयोग कर लड़कियों को भारत तक पहुंचाते है। इस बात का खुलासा कल एसएसबी के  जवानों ने किया तो सारे घटनाक्रम से पर्दा उठ गया।


दरअसल, 57वीं वाहिनी एसएसबी के कार्यवाहक कमांडेंट बृजपाल नेगी के निर्देश पर मेलाघाट सी कंपनी के जवान सोमवार देर शाम सीमा पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान पिलर संख्या 796-1 के समीप कुछ लोग नेपाल की ओर से आते दिखाई दिए। पूछताछ में उनके बयानों में विरोधाभास मिला तो जवानों ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। इस पर उप कमांडेंट सुवेंद्र अंबावत, एसएसबी की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) व नेपाल के एनजीओ ने उनसे पूछताछ की। 

कमांडर इंस्पेक्टर मो. नाजिम ने बताया कि नेपाल के कंचनपुर जिले के दोधारा चांदनी गांव के सुरखेते वार्ड दस निवासी डंबर बहादुर सुनार अपनी पत्नी धनसरा के साथ भारत आ रहा था। वे अपने साथ चार लड़कियों को नौकरी दिलाने के नाम पर दिल्ली व पंजाब ले जा रहे थे। दो नाबालिग लड़कियों को तो पता भी नहीं था कि वे कहां जा रही हैं। दो ने पांच से छह हजार रुपये महीने की नौकरी दिलाए जाने की बात कही। मतलब साफ है कि नेपाल की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण नाबालिग लड़कियों को देहव्यापार जैसे काले गर्त में धकेला जा रहा है। भारत धीरे धीरे इसकी चपेट में धस्ता जा रहा है। युवाओं कम उम्र में ही इस तरफ तेजी से बढ़ रहें जिससे युवाओं की मानसिक स्थिति पर दुष्परिणाम देखने की मिल रहें हैं।