पीएम फंड, सीएम फंड, WHO फंड, विश्व बैंक फंड के बाद भी जो युवाओं को मुफ्त टीका नहीं दे सके। उनसे प्रदेश की युवा रोजगार की उम्मीद लगाए बैठा है। गजब का विकास है सहाब।

उत्तराखंड में कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर मजाक चल रहा है। देहरादून जिले में पिछले 01 जुलाई से लेकर 09 जुलाई तक कहीं भी 18 से 44 आयु वर्ग के लिए मुफ्त ऑनलाइन सेंटर उपलब्ध नही था। आज खबर है कि देहरादून में 18 से 44 आयु वर्ग का टीकाकरण ही बन्द कर दिया गया है। दो दिन पहले 44+ आयु वर्ग के लिए भी वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण बन्द कर दिया गया था। दूसरी लहर की शुरुआत में मुफ्त टीकाकरण की घोषणा करने वालों ने बहुत जल्दी ही घुटने टेक दिए हैं। 


कोरोना मामलों में कमी देखकर प्रधानमंत्री ने कहा था कि टीकाकरण का काम केंद्र सरकार करेगी लेकिन उनकी बातें भी जुमलों जैसी ही सिद्ध हो रही हैं। दरअसल, सरकार अब किसी को टीका मुफ्त में देना नही चाहती है। इसलिए आए दिन टीकाकरण रोककर यह कहा जाता है कि वैक्सीन की कमी है। पहाड़ समीक्षा ने जब Cowin पोर्टल पर 01 जुलाई को देहरादून जिले के टीकाकरण केंद्रों को सर्च किया तो पाया कि 01 जुलाई से 09 जुलाई तक एक भी केंद्र पर 18 से 44 आयु वर्ग के लिए मुफ्त टीकाकरण नही हो रहा था जबकि पैसे वाले केंद्र बहुत थे। लेकिन उस वक्त 45+ आयु वर्ग के लोगों के लिए कुछ जगह पर मुफ्त टीके उपलब्ध थे।

09 जुलाई के बाद ऑनलाइन कोई केंद्र नही दिखाया जा रहा था। इसका मतलब है कि 01 जुलाई को ही सरकार को यह पता था कि 09 जुलाई तक वैक्सीन खत्म हो जाएगी। लेकिन वैक्सीन 06 जुलाई को ही खत्म हो गई। क्या यह मजाक नही है ? ऐसे कई 18 से 44 आयु वर्ग के लोग हैं जिनको पहला टीका लगे 60 दिन से अधिक हो गये हैं। अब अगर सरकार उनको दूसरा टीका मुफ्त में नही देती तो अधिकांश युवा दूसरा टीका लेंगे ही नही। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार ने जो पहला टीका मुफ्त दिया वह भी बेकार गया। और अगर अब युवक दूसरा टीका निजी हस्पतालों से लागातें है तो केंद्र एक ही टीके से दो टीकों के पैसे वसूल कर लेगा। क्योंकि केंद्र को टीका मिला 150 का निजी हस्पताल ने लगाया 600 से 700 का, तो हो गया न पैसा वसूल। 

कुल मिलाकर यह निष्कर्ष निकला है कि केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर हर प्रकार से जनता का शोषण किया है। सच यह है कि किसी भी केंद्रीय या राज्य नेता को इससे कोई फर्क नही पड़ता कि राज्य का नागरिक जिये या मरे। करोड़ो रुपया कोरोना के नाम पर डकार गये। पीएम से लेकर सीएम फंड में आया पैसा डकार गये और युवाओं के लिए नौकरी तो बहुत दूर की बात है, दो खुराक टीका मुफ्त में देने की व्यवस्था नही है। क्या इस सरकार से युवाओं को रोजगार की उम्मीद रखनी चाहिए।