हरदा ने तीरथ सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र पर सादा निशाना, कहाँ पूर्व दोनों मुख्यमंत्री भले आदमी हैं। लेकिन, केंद्र ने दोनों के साथ हास्यास्पद बर्ताव किया।

हरफनमौला हरदा को राजनीति का लम्बा तजुर्बा है। ऐसे में उनका उपचुनाव को लेकर दिया गया बयान कई लिहाज से महत्वपूर्ण नजर आता है। हरीश रावत ने कहा कि इससे बड़ा झूठ क्या हो सकता है कि कोरोना संक्रमण की वजह से उपचुनाव नहीं हो सकते और संविधानिक बाध्यता के कारण मुख्यमंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में सल्ट विधानसभा में उपचुनाव हुए, तो तीरथ सिंह को वहां से क्यों नही लड़वाया गया ? हरदा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र से किसी विधायक का इस्तीफा करवाकर भी चुनाव लड़ सकते थे। कानून की पूरी जानकारी न होने और मुगालते में रहने के कारण राज्य के ऊपर एक और मुख्यमंत्री थोपना चाहती है केंद्र सरकार।


हरदा ने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्र ने अपने अहम में दो नेताओं की स्थिति हास्यास्पद कर दी। दोनों ही बड़े भले आदमी हैं। त्रिवेंद्र को बजट सत्र के बीच में बदलने का निर्णय और तीरथ सिंह की स्थिति उनके अपने बायानों ने और बचीखुची कसर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उनके चुनाव लड़ने के निर्णय पर फैसला न लेने के कारण हास्यास्पद कर दी। बतौर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह एक हास्यास्पद मुख्यमंत्री बनकर रह गए। एक मुख्यमंत्री को पहले अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष को दिल्ली जाकर मजबूरी बस देना पड़ रहा है, फिर राज्यपाल को। भाजपा ने इन लगभग साढ़े चार सालों में राज्य को केवल बेरोजगारी दी। अर्थव्यवस्था छीन-बिन कर दी। 

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखंड को भाजपा ने प्रयोगशाला बना कर रख दिया है। पांच साल में तीन-तीन मुख्यमंत्री और किसी को भी कार्यकाल पूरा करने की इजाजत नही। राज्य की जनता रोजगार, शिक्षा, महंगाई के लिए तड़प रही है और भाजपा को केवल सत्ता में बने रहने की फिक्र बेचैन कर रही है।