वर्ष 2021 के लिए कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने के पक्ष में सरकार, कोरोना की तीसरी लहर के मध्यनजर लिया गया अहम फैसला। शिव भक्तों को मिलेगा गंगा जल ।

उत्तराखंड में हर साल लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचते हैं। यहाँ स्नान कर वह पवित्र गंगाजल को लेकर वापस अपने अपने राज्यों के लिए लौट जाते हैं। कांवड़ में हर साल हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के लोग सर्वाधिक  भाग लेते हैं। इसके अलावा कुछ प्रतिशत यात्री उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश जैसे जिलों से भी हरिद्वार स्नान करने हेतु आते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना की तीसरी लहर के मध्यनजर पहले ही यात्रा पर रोक के आदेश जारी कर दिये गये हैं। इसकी एक वजह कुम्भ में हुई लापरवाही भी मानी जा रही है।


कुम्भ में सरकार ने कोरोना कि दूसरी लहर की अनदेखी की जिसका नतीजा यह हुआ कि राज्य में 6000 से अधिक लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठे। अब मुख्य सचिव ओमप्रकाश के निर्देश के बाद शहरी विकास विभाग ने इसके आदेश कर दिए। शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में उत्तराखंड सरकार पर कुम्भ को लेकर कई गम्भीर आरोप लगे थे। इन आरोपों में सबसे बड़ा आरोप कोरोना जांच में हुआ घपला है जिस पर जांच जारी है। पूरी होगी कि नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन तीसरी लहर को लेकर सरकार चौकन्नी जरूर है।

पिछले साल 15 मार्च को प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला मिला था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया था। साथ ही सरकार ने यह भी फैसला लिया था कि शिव भक्तों को गंगा जल उन्हीं के राज्यों में उपलब्ध कराया जाएगा। कांवड़ यात्रा में दूसरे राज्यों से लाखों की संख्या में कांवड़ियां हर की पैड़ी आते हैं। जहां से गंगाजल लेकर शिवरात्रि पर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का सरकार की ओर से निर्णय हो चुका है। अभी विभाग की ओर से इसका आदेश नहीं हुआ है। 

अगर कांवड़ यात्रा पर रोक लगती है तो शिव भक्तों को गंगा जल पूर्व की तरह ही उनके राज्यों में वितरित करने की योजना बनाई जाएगा। इधर बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। अगर सुप्रीम कोर्ट रोक को जारी रखता है तो बद्रीनाथ व केदारनाथ समेत अभी पावन धर्मस्थलों का प्रसाद ऑनलाइन वितरण किये जाने पर जोर दिया जा सकता है। गौरतलब है कि सरकार पर्यटन से जुड़े लोगों को खुद से आर्थिक मदद नही देना चाहती है, इसलिए चारधाम यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना मजबूरी बना हुआ है।