जिन बातों को लेकर अलग राज्य की अलख जगी, 20 वर्ष पूरे हो चुके लेकिन आज भी बदहाल व्यवस्थाओं के साथ जीवन यापन कर रहे ग्रामीण ।

उत्तरांचल राज्य की मांग में अहम भूमिका थी प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां और उन परिस्थितियों में शामिल थे सैकड़ों पाणा भनाली जैसे गांव। लेकिन प्रदेश बनने के 20 वर्ष बाद भी आज तक वही भौगोलिक परिस्थितियां लोगों के आड़े आ रही हैं तो मतलब साफ है कि विकास के नाम पर नेताओं ने सिर्फ अपनी जेबें भरी और पहाड़ी क्षेत्र की जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया। चमोली जिले के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होना लोगों के जीवन जीना आज भी भारी पड़ रहा है। और यह आलम केवल अकेले चमोली जिले का नहीं है, तमाम पहाड़ी जिले स्वास्थ्य सेवाओं से लाचार ही नजर आते हैं।


मंगलवार को चमोली तहसील के अंतर्गत पाणा भनाली गांव में एक व्यक्ति चट्टान से गिरकर घायल हो गया, लेकिन गांव में सड़क न होने पर घायल व्यक्ति को ग्रामीणों ने 15 किमी पैदल चलकर डंडी के सहारे लाते नजर आए तो दिल विचलित हो उठा कि राजनीतिक दल किस विकास की बात कर रहें है। गग्रामीणों से बातचीत में पता चला की प्रदेश बनने ले 20 वर्ष बाद भी प्रदेश सरकारें गांव तक सड़क और अस्पताल की सुविधा नहीं दे सकी है, जिससे लोगों को भारी परेशानियां उठानी पड़ती हैं।

देखा जाय तो इसके लिए कुछ हद तक यहां की जनता भी जिम्मेदार है। क्योंकि आज संचार त्वरित है और सूचनाओं का आदान प्रदान बेहद आसान है। यह जानते हुए भी लोग मतदान बिना सही विश्लेषण के कर रहें हैं। दर्जनों ऐसे गांव अगर चुनाव का ही बहिष्कार कर दें तो राजनीतिक रोटियां सेकने वालों की अकल दो दिन में ही ठिकाने आ जाती, लेकिन बदकिस्मती से मतदाता ही दारू और पैसों में बिक जाता है जिसका खामियाजा इस रूप में सामने आता है कि 20 वर्षों में क्षेत्र को वह सुविधाएं नही मिल पा रही हैं जो जनता का प्रथम अधिकार है।