लगातार नजरअंदाज, जनता में हो रही है तरह तरह की बातें। क्या इसी दिन के लिए भाजपा में शामिल हुए थे सीनियर नेता। पार्टी से महत्वपूर्ण होता है चेहरा, फिर भी लगातार नजरअंदाज क्यों ?

उत्तराखंड में अभी तक बागी नेताओं का मन शांत नही हुआ है कि केंद्र सरकार ने फिर से कर दी एक और बड़ी गलती। केंद्रीय मंत्रिमंडल में तीरथ, त्रिवेंद्र का नाम लेकिन सतपाल, हरक सिंह और सुबोध उनियाल का नाम नही। पुष्कर सिंह धामी को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने से नाराज कुछ वरिष्ठ विधायकों को मनाने में पार्टी भले ही कामयाब हो गई हो, लेकिन विधायकों में टीस अभी भी बरकरार है। सूत्रों से खबर है कि हरक सिंह कांग्रेस से बगावत के बाद विकल्प न होने के चलते किसी भी प्रकार की नाराजगी की बात को नकार रहें हैं, लेकिन अपने सीनियर होने के नाते आहत जरूर हुए हैं। नाराजगी इस बात कि भी है कि सीनियर नेताओं से बिना सलाह के ही धामी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया गया।


अब दोबारा से केंद्र ने बागी नेताओं की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। मोदी सरकार केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार कर रही है। क्योंकि अगले साल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है इसलिए केंद्र सरकार कुछ चेहरों को उनकी वफादारी का ईनाम देना चाहती है। इसमें उत्तराखंड राज्य के चार नाम शामिल किये गये हैं ऐसी खबरें राष्ट्रीय समाचार पत्रों में छपी हुई हैं। उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत, भाजपा मीडिया सलाहकार अनिल बलूनी और अजय भट्ट के नामों की चर्चा है। अब यह बताने की जरूरत नही है कि ये सभी भाजपा के अपने ही लोग हैं। ऐसे में अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस के बागी नेताओं की भाजपा में कोई पूछ ही नही है।

सतपाल महाराज जैसा चेहरा भी भाजपा लगातार नकार रही है। शायद भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा वाली गलती को दोहराना चाहती है। केंद्रीय भाजपा दल चाहता है कि 2022 में उनकी सरकार बने तो सारे चेहरे उन्हीं की पार्टी के हों। लेकिन वर्तमान में पार्टी के पास इतना लोकप्रिय चेहरा कोई नही है। अगर सतपाल महाराज घर वापसी करते हैं तो भाजपा को 2022 बहुत भारी पड़ सकता है। क्योंकि सतपाल महाराज की वापसी के साथ कई अन्य नेता भी वापसी करेंगे जिससे भाजपा की स्थिति बेहद खराब हो सकती है।