भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की बात माननी पड़ेगी सिर्फ तीन लोग ही पूरी पार्टी को चला रहे हैं। मिलबांटकर खाइए भैय्या, हरि गुण गाइये भैय्या ।

उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश  में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार का होना अपने आप में सन्देहात्मक है। पूर्ण बहुमत के बाद भी केंद्र से लेकर राज्यों तक बदलाव चल रहा है। केंद्र में तो दो या तीन बार का मंत्रिमंडल विस्तार हो चुका है। इससे साफ होता है कि भाजपा के दो चार स्थाई चेहरों को छोड़कर पार्टी अपने सभी नेताओं को दो-दो, ढाई-ढाई साल मझे करवाना चाहती है। केंद्र के पास नीतियों के नाम पर खुद कुछ नही है तो ऐसे राज्य जो भाजपा शासित हैं, से जनता की उम्मीद लगाए रखना की विकास होगा, गलत है। पहले तीरथ सिंह को संवैधानिक खतरा बता कर हटा दिया, जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री उसी स्थिति में अपनी कुर्शी पर बनी हुई हैं। और अब केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा रहा है तो नैनीताल सांसद अजय भट्ट की एंट्री पर रमेश पोखरियाल निशंक को स्वास्थ्य कारणों को हवाला देकर घर भेज दिया।

आपको याद होगा जब अमित शाह कई दिन हस्पताल में पड़े रहे लेकिन किसी को गृहमंत्री के पद पर किसी को नही आने दिया गया था। लेकिन निशंक को राज्य में फिट करने के लिए स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वापसी का टिकट दे दिया गया। पार्टी के भीतर खाओ और खाने दो की नीति अच्छे से काम कर रही है। लेकिन, जनता है कि कुछ समझ नही पा रही है क्योंकि जनता को लगता है कि मोदी है तो मुमकिन है। सोचने वाली बात यह है कि भाजपा के नेता और मीडिया बात को रखने में इतने माहिर हो गये हैं कि जनता कुछ समझ ही नही पाती है। निशंक के इस्तीफे को भी ऐसे ही दिखाया जा रहा है कि उन्होंने पद पर बने रहने की इच्छा को स्वास्थ्य कारणों से नकार दिया है।

इसके पीछे क्या खेल है यह हम आपको समझाते हैं। दरअसल, राज्य भाजपा के पास मुख्यमंत्री के लिए अपना कोई चेहरा नही है। इसलिए नैनीताल विधायक अजय शर्मा को केंद्र बुलाकर रमेश पोखरियाल निशंक को वापस राज्य में भेज दिया जाएगा। 2022 में अगर भाजपा चुनाव जीतती है तो मुख्यमंत्री का चेहरा रमेश पोखरियाल निशंक ही होंगे। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि भाजपा कांग्रेस के बागी नेताओं को कमान देना नही चाहती है, इसलिए किसी ऐसे को ही मुख्यमंत्री बनाना बेहतर है जिसको पहले से पार्टी ने ख़िलापिलाकर भेजा हो। निशंक पर बतौर मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। एक लम्बा समय अब केंद्र में गुजारने के बाद भाजपा को उम्मीद है कि जनता सब भूल गई होगी।