24 जुलाई से ठप पड़ा टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे। शब्जियाँ छूँ रही आसमान, यात्री कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर कर पहुंच रहे जिले में ।

टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे पर स्वाला के पास 24 जुलाई की सुबह 11 बजे पहाड़ी दरकने से मलबा आ गया था। बुधवार की शाम सात बजे सड़क खोल दी गई लेकिन 7:15 बजे फिर से बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गया। बुधवार की शाम स्वाला में मलबा हटाकर 105 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हुई लेकिन 15 मिनट बाद ही फिर से मलबा आ गया। भारतोली में बुधवार को दिनभर जेसीबी और पोकलैंड मशीनें मलबा हटाने में लगी रहीं लेकिन सड़क नहीं खुल पाई। गुरुवार को भारतोली समेत स्वाला में मलबा हटाने का काम सुबह छह बजे से ही शुरू कर दिया गया। 

एनएच के ईई एलडी मथेला ने बताया कि लोहाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग पर भारतोली में मलबा ज्यादा होने से दोपहर दो बजे तक सड़क खुलने की संंभावना नहीं है। आपको बता दें कि यात्रियों को मैदानी क्षेत्र टनकपुर जाने के लिए हल्द्वानी होते हुए और पिथौरागढ़ जाने के लिए अल्मोड़ा होते हुए निकलना पड़ रहा है। सब्जी किराना और अन्य जरूरी सामान भी देवीधुरा के रास्ते लाया जा रहा है। दूसरी तरफ जिले की चार ग्रामीण सड़कें भी अभी तक खोली नहीं जा सकी है। इससे सब्जी और अन्य दैनिक खाद्य पदार्थो की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत बढोत्तरी हुई है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार टनकपुर-पूर्णागिरि मार्ग  भी 11 दिन से बन्द पड़ा हुआ है। लोनिवि द्वारा बनाया गया वैकल्पिक मार्ग भी भूस्खलन से ध्वस्त हो गया है। जबकि श्रद्धालु पगडंडियों से होते हुए पैदल पूर्णागिरि के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने यात्रा पर रोक लगा रखी है फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं।