पुष्कर सिंह धामी बने उत्तराखंड के 11वें मुख्यमंत्री, अनुभव के आधार पर नजर नही आता कोई श्रेष्ठ नेतृत्व विकल्प। इस निर्णय के बाद भाजपा में बगावत के सुर हो सकतें है तेज।

पुष्कर सिंह धामी का जन्म 06 सितंबर 1975 में जिला पिथौरागढ़ की ग्राम सभा टुण्डी, तहसील डीडीहाट में हुआ है। वह एक साधारण परिवार से आते हैं। वर्ष 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों में रहकर विद्यार्थी परिषद में कार्य किया। 11 जनवरी 2005 को प्रदेश के 90 युवाओं के साथ विधानसभा का घेराव करने के लिए एक रैली आयोजित की। जिसे युवा शक्ति प्रदर्शन के रूप में उदाहरण स्वरूप आज भी याद किया जाता है। वर्ष 2010 से 2012 तक शहरी विकास अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

वर्ष 2012 में पहली बार उन्होंने विधानसभा में जीत हासिल की और वर्तमान में पुष्कर सिंह धामी खटीमा विधानसभा सीट से विधायक हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री का अनुभव देखकर लगता नही है कि वे राज्य के लिए निर्णायक भूमिका में अधिक देर तक किरदार निभा सकेंगे। पहाड़ समीक्षा लगातार अपने लेखों में भाजपा की कुमाऊँ में खराब स्थिति को लेकर लेख लिख रहा है। ऐसे में यह कुमाऊँ में चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पुष्कर सिंह धामी का राजनैतिक अनुभव बता रहा कि उनसे अनुभवी कई नेता पार्टी के भीतर मौजूद हैं। चाहे वे कांग्रेस से गए हुए ही सही लेकिन गद्दावर छवि के नेता है। सवाल ये है कि राजा अगर बुद्धिमता में अल्प  और मंत्री चतुर हो तो राज्य में भ्रष्टाचार आसानी से बढ़ जाता है। शीर्ष नेतृत्व अगर चौकन्ना नही हुआ तो स्पष्ट है कि फिर से वही हाल होगा जैसा पूर्व में हुआ। इस निर्णय के बाद पार्टी में बगावत होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं क्योंकि प्रदेश में अनुभवी नेताओं की कमी नही है फिर भी केंद्र सरकार अपनी दखलंदाजी से अनुभवहीन लोगों को मुख्यमंत्री बना रही है। इसका दुष्परिणाम यह है कि राज्य अन्य राज्यो से लगातार पिछड़ रहा है।