नींद से जागा प्रशासन, कल सैकड़ो वाहनों को सीमाओं से लौटाया वापस। बिना कोरोना रिपोर्ट के पर्यटक राज्य में घूम रहे हैं बेरोकटोक।

पहाड़ समीक्षा उत्तराखंड में पर्यटकों के बेरोकटोक घूमने और उत्तराखंड की सीमाओं पर उचित जांच न होने के लेख लगातार लिख रहा है। हमारी खबरों का असर है कि प्रशासन की नींद खुली और अब पर्यटकों पर रोकटोक शुरू की गई है। अभी कोरोना का खतरा टला नही है, ऐसे में पर्यटकों का बेरोकटोक पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचना मौत को दावत देना जैसा है। हमारे लगातार खबर लिखने से प्रशासन की नींद खुली तो अब एक्शन प्लान तैयार हुआ। सरकार के निर्देश पर प्रदेश की सीमाओं पर चेकिंग शुरू कर दी गई है। 72 घंटे के भीतर की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट व होटल में बुकिंग के प्रमाण दिखाए बिना पर्यटकों को मसूरी और नैनीताल समेत अन्य प्रमुख पर्यटक स्थलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।


कोरोना संक्रमण के मामले घटने और कोरोना कफ्र्यू में रियायत के बाद से मसूरी, कैम्पटी फाल, नैनीताल, लैंसडौन व अन्य पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक उमड़ रहे हैं। यूं तो हर दिन ही हाजरों पर्यटक पहुंच रहे हैं लेकिन सप्ताह के अंत में भीड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ रही है। उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र जितना खूबसूरत है उतना ही स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा हुआ है। ऐसे में पर्यटकों का पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंचा, कोरोना की तीसरी लहर के लिए बुलावा देने जैसा हैं। हो सकता है इस पर कल मुख्यमंत्री धामी को पीएम की तरफ से निर्देश मिले हों, लेकिन देर से ही सही जागे तो हैं।


शनिवार को प्रदेश में दिनभर में तमाम पुलिस चेक पोस्ट से ऐसे ही करीब 5500 वाहनों को लौटाया गया। इनमें से 3400 से ज्यादा वाहन मसूरी आने वाले थे। हालांकि, इसके बावजूद मसूरी और नैनीताल में खासी भीड़ रही और दिनभर जाम ने परेशान किया। आपको बता दें कि पर्यटन को लेकर उच्च न्यायालय पहले ही सख्त टिप्पणी कर चुका है लेकिन सरकार को सिर्फ राजस्व ही नजर आ रहा है इसलिए राज्य नागरिक की जान से खिलवाड़ हो रहा है।