सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र में कहा गया है कि इस विंसगति को दूर करने के लिए अप्रैल 2020 में पुलिस मुख्यालय को ज्ञापन भी दिया गया, लेकिन इस पर आज तक कोई  कारवाई नहीं हो पाई है। 

 

पुलिस मुख्यालय की एक गलती पर सिविल पुलिस के इंस्पेक्टरों में भारी नाराजगी है। दरअसल, पदोन्नति प्रक्रिया में 2002 बैच के एसआई से पदोन्नत इंटेलीजेंस सेवा के इंस्पेक्टरों को शामिल किए गये हैं जबकि सिविल पुलिस में 1989-90, 97-98 और 2000-02 के एसआई को अर्ह होने के बावजूद पदोन्नति में शामिल नहीं किया गया। अब इसको लेकर सिविल पुलिस और इंटेलीजेंस सेवा के बीच खींचतान शुरू हो गई है। 

आपको बता दें कि पुलिस मुख्यालय ने डिप्टी एसपी के सात पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की है। इन पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया में 2002 बैच के एसआई से पदोन्नत इंटेलीजेंस सेवा के इंस्पेक्टरों को शामिल किया गया है। अब सिविल पुलिस के इंस्पेक्टरों ने आरोप लगाया है कि एक ही संवर्ग होने के बावजूद पुलिस मुख्यालय ने 2014 में नियम विरुद्ध इंटेलीजेंस के एसआई को पदोन्नति प्रदान कर दी। 

जबकि सिविल पुलिस में 1989-90, 97-98 और 2000-02 के एसआई के लोग पदोन्नति की राह देख रहें हैं। इस तरह चयन वर्ष, पीटीसी मैरिट, चयन परीक्षा में वरिष्ठ होने के बावजूद सिविल पुलिस के एसआई वरिष्ठता में पिछड़ गए। जबकि अन्य सभी विभागों में फीडर कैडर की वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति प्रदान की जाती है। सिविल पुलिस ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो नागरिक पुलिस के एसआई अगले 15 से 20 साल तक इंस्पेक्टर और डिप्टी एसपी नहीं बन पाएंगे।