सरकार की अनदेखी फिर से पड़ सकती है भारी, राज्य सरकार को नागरिक सुरक्षा से ज्यादा राजस्व की चिंता, पहाड़ी क्षेत्र न हो जाए तीसरी लहर का शिकार ।

उत्तराखंड में आज कल बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से पर्यटन के लिए लोग आ रहें हैं। उत्तराखंड की सीमाओं पर कोरोना सुरक्षा को लेकर कोई प्रबंध न होने के कारण कुछ पता नही है कोई व्यक्ति कोरोना जांच के बाद ही राज्य में प्रवेश कर रहा है या ऐसे ही प्रवेश पा रहा। मसूरी, नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल पर्यटकों से खचाखच भरे पडे हैं, कोई पूछने वाला नही कोई जांचने वाला नही। कुम्भ के नाम पर जांच के बाद भी राज्य के 7000 से अधिक लोगों ने जाने गवाई हैं, ये बात सरकार महज 04 माह में ही भूल गई है।

आपको बता दें कि कोरोना कि तीसरी लहर को लेकर अगस्त माह के लिए अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में प्रदेश सरकार पर्यटन को लेकर ऐसी नजरअंदाजी राज्य के नागरिकों पर भारी पड़ सकती है। शुक्रवार को मसूरी और नैनीताल में दिनभर जाम की स्थिति रही। वहीं, होटलों में भी 80 फीसद तक बुकिंग हो चुकी है। जाम खुलवाने और कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस बीच कई जगहों से पुलिस के साथ पर्यटकों की नोंकझोंक की खबरे भी प्रकाश में आई हैं।

आज राज्य की आर्थिक स्थिति किसी से झुपी नही हुई है। सरकार के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नही है। ऐसे में अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो क्या सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पहाड़ी जिलों में सक्रिय तरीको से लागू कर पायेगी? उत्तराखंड आज भी भौगोलिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। सीमांत जिलों से दिल को विचलित करने वाली तस्वीरें राज्य गठन के 20 वर्ष बाद भी आ रहीं हैं। लोग 20-20 किलोमीटर पैदल पगडंडियों के सहारे मरीजों को लेकर पहाड़ो से उतरने को मजबूर हैं। लेकिन सरकार को ऐसे समय में पर्यटन ज्यादा महत्वपूर्ण नजर आता है। 

राजनीति गलत दिशा में बढ़ रही है ये तो लगभग एक दशक या उससे पहले ही साफ हो गया था। लेकिन, राजनीति इतनी विवेकहीन स्थिति में पहुंच जाएगी, यह कल्पना दिल को झगझोड़ देती है। हम एक तरफ मानव कल्याण के दावे कर रहें है और दूसरी तरफ सामाजिक असुरक्षा को लगातार बढ़ावा दे रहें है। हमने अनजाने में ही सही मानव जीवन को हर दिन के लिए चुनौती पूर्ण कर दिया है, खासकर स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में। नीतियों के नाम पर बारबार वही पुरानी नीतियां आगे से पीछे और पीछे से आगे घूम रही हैं। एक वृत्ताकार भ्रम में घूमता हुआ इंसान इन सब से कैसे मुक्त होगा, कहना मुश्किल हो गया है।