शुक्रवार देर रात 1 बजकर 28 मिनट पर उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भटवाड़ी डुण्डा, मनेरी, मानपुर में भूकम्प के हल्के झटके महसूस हुए है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेन्द्र पटवाल ने बताया कि भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की कोई सूचना नही है। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.4 मापी गई, जबकि भूकंप का केंद्र केदारनाथ के निकट उत्तरकाशी-रुद्रप्रयाग जनपद की सीमा पर दर्ज किया गया है ।


उत्‍तराखंड में आपदा में घर क्षतिग्रस्त होने पर बढ़ेगा अनुदान, विस्थापन एवं पुनर्वास नीति में बदलाव की तैयारी:- उत्तराखंड अतिवृष्टि, भूस्खलन, भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है। हर साल ही प्राकृतिक आपदाएं जनमानस के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। स्थिति ये है कि प्रदेशभर में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों की संख्या 397 पहुंच गई है और प्रति वर्ष यह आंकड़ा बढ़ रहा है। उस पर आपदा प्रभावित गांवों के पुनर्वास की रफ्तार बेहद धीमी है। आंकड़ों पर ही गौर करें तो वर्ष 2012 से अब तक 44 गांवों के 1101 परिवारों का ही पुनर्वास हो पाया है।

असल में आपदा प्रभावितों को राहत देने के मामले में विस्थापन एवं पुनर्वास नीति-2011 के कुछ मानक भी आड़े आ रहे हैं। मसलन, यदि किसी घर में एक से अधिक परिवार रह रहे हैं तो आपदा प्रभावित श्रेणी में आने पर एक ही परिवार को मुआवजा देने का प्रविधान है। नीति में यह भी उल्लेख है कि उन्हीं परिवारों को आपदा प्रभावितों में शामिल किया जाएगा, जिनका जिक्र वर्ष 2011 की जनगणना में है। जबकि, तब से अब तक परिवारों की संख्या काफी बढ़ गई है। इसके अलावा मानकों में अन्य खामियां भी है, जो विस्थापन एवं पुनर्वास की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। इस सबको देखते हुए अब नीति के मानकों में बदलाव की कसरत शुरू की गई है। आपदा प्रबंधन मंत्री डा धन सिंह रावत ने हाल में ही हुई समीक्षा बैठक में इसके निर्देश दिए थे।

प्रस्तावित बदलाव:-

1-किसी परिवार को आपदा प्रभावित की श्रेणी में लेने को वर्ष 2011 की जनगणना की बाध्यता हो खत्म।

2-घर क्षतिग्रस्त होने की दशा में घर बनाने को दी जाने वाली चार लाख की अनुदान राशि में की जाए वृद्धि।

3-विस्थापन को चयनित आपदा प्रभावित गांव का कोई परिवार इससे इनकार करता है तो उसे दिया जाए 15 दिन का वक्त और फिर लिया जाए निर्णय।

4-यदि किसी परिवार का घर क्षतिग्रस्त है और उसके पास नया घर बनाने को जगह नहीं है तो उसे दी जाए उतनी ही सरकारी भूमि। बदले में उसकी भूमि होगी सरकार के नाम हो दर्ज।