देवस्थानम बोर्ड के बाद नाराज चल रहे पुरोहितों की डर से सीट बदलने पर विचार, अगर उपचुनाव में मिली हार तो पार्टी पर गहरा सकता है संकट। इसलिए पूर्व से ही गहन मंथन शुरू। राज्य में चुनाव प्रचारक की भूमिका में खुद मोदी ही रहेंगे आगे।

दिल्ली दौरे से पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह रामनगर चिंतन शिविर में पार्टी द्वारा तय की गई चुनावी रणनीति पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात को दिल्ली आए हैं। लेकिन अचानक बुलावे पर  मुख्यमंत्री बुधवार को दोपहर में दिल्ली पहुंच गए, फिर भी देर रात तक उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात नहीं हो पाई थी। इस दौरे को मुख्यमंत्री के उप चुनाव से तो जोड़ा ही गया, साथ ही उप चुनाव में अड़चन की स्थिति में नेतृत्व परिवर्तन की बात भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से फैल रही है। आपको बता दें कि सीएम के अलावा राज्य के दो मंत्री भी दिल्ली में मौजूद हैं, ऐसे में अटकलों का बाजार गर्म है।


साढ़े तीन महीने पहले प्रदेश सरकार में अचानक  हुए नेतृत्व परिवर्तन के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री तीरथ पहले दो बार दिल्ली दौरा कर चुके हैं और अब अचानक आलाकमान द्वारा दिल्ली बुलाए जाने से सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं उठने लगीं। रामनगर में आयोजित भाजपा के तीन दिनी चिंतन शिविर में भाग लेकर मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री देहरादून पहुंचे। बुधवार सुबह वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए। ऐसे में कुछ भी स्पष्ट नही है कि भाजपा राज्य में 2022 को लेकर क्या रणनीति बना रही है।

सूत्रों से खबर मिली है कि यह दौरा उपचुनाव को लेकर अहम है। बात उठ रही है कि यदि उपचुनाव होता है तो मुख्यमंत्री गंगोत्री सीट से शायद ही चुनाव लड़ें, क्योंकि देवस्थानम बोर्ड को लेकर वहां तीर्थ पुरोहित नाराज चल रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री गढ़वाल संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाली किसी विधानसभा सीट को अपने लिए चुन सकते हैं। इसलिए ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि तीरथ सिंह को गढ़वाल मण्डल से कोई सुनिश्चित सीट नही मिलती तो  नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। क्योंकि ऐसा करना बीजेपी की मजबूरी होगी।

अब भाजपा के लिए खेल बिगड़ता नजर आ रहा है इसलिए आलाकमान ने सीएम को दिल्ली बुलाया है। क्योंकि पार्टी नही चाहती कि चुनाव से पहले कोई भी नेता नाराज हो इसलिए आपसी विचार विमर्श के बाद ही पार्टी कोई फैसला करना चाहती है। अगर तीरथ सिंह रावत के लिए कोई अपनी सीट नही छोड़ता तो मतलब साफ है कि सीएम का चेहरा बदला जाएगा।