पलायन को रोकने और युवाओं को पर्वतीय क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए सरकार का सकारात्मक कदम। उद्योगों को पर्वतीय क्षेत्र में स्थापित करने की दिशा में विचार ।

पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना के साथ ही स्थानीय निवासियों को रोजगार मिल सके, इसके लिए सरकार अब लैंड बैंक बनाने पर जोर दे रही है। पर्वतीय जिलों में लैंड बैंक बनाने के लिए जमीनों की तलाश की जा रही है। सरकार ने जिलाधिकारियों के साथ ही विभागीय अधिकारियों को हर जिले में ऐसी जगहों की चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। 

वर्तमान में प्रदेश के उद्योगों की स्थिति कुछ इस प्रकार है। 3222 मध्यम उद्योग, 543 बड़े उद्योग और 68 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग स्थापित हैं। लेकिन, अधिकांश उद्योग मैदानी जिलों या सुगम स्थानों पर हो स्थापित हैं। इनमें से देहरादून जिले में सेलाकुई, पौड़ी गढ़वाल में कोटद्वार, हरिद्वार जिला, ऊधमसिंह नगर जिले में पंतनगर, सितारगंज, नैनीताल जिले में काशीपुर और नई टिहरी जिले में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं।
 
प्रदेश में सर्वाधिक पलायन पहाड़ी जिलों से ही हुआ है। प्रमुख कारणों में सबसे पहला कारण रोजगार ही है। उद्योगो के लिहाज से नई टिहरी को छोड़ शेष सभी मैदानी क्षेत्र हैं। इसलिए  प्रदेश सरकार अब उद्योगों को पहाड़ चढ़ाने की तैयारी में जुट गई है। अब सरकार लैंड बैंक की बात तो कर रही है लेकिन अभी चुनौती कम नही हैं, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां एक स्थान पर विस्तृत जमीन मिलने में दिक्कतें आती हैं। साथ ही आशंका यह भी जताई जा रही है कि यह बात भी केवल चुनावी स्टंट बनकर न रह जाए। क्योंकि उत्तराखंड राज्य बनने के 20 वर्ष बाद पहाड़ी क्षेत्र जिस तरह से पिछड़ा है, उसके लिए सीधे तौर पर राजनीति और राज्य नेता ही जिम्मेदार हैं।