राजनीति का दोहरा चरित्र, अपने आप को राज्य हितैसी बताने वाली भाजपा दूसरे राज्यों के शरणार्थियों को आवास देने की बना रही योजना। उत्तराखंड नेताओं की जागीर बनकर रह गया, मूल नागरिक के अधिकारों का हो रहा हनन।

उत्तराखंड में जहां एक तरफ अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ दूसरे राज्यों के ऐसे लोग जिनके पास न रहने को घर और कमाई का साधन, की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आज उत्तराखंड में घटित हर अपराध के पीछे 99% लोग बाहरी राज्यों से तालुक रखतें हैं। राजधानी देहरादून में हो रही चोरियों में भी बिजनौरियों और दिन फेरी लगाने वालों का बड़ा हाथ है। बाहरी राज्यों के लोग यहां आकर न सिर्फ चोरी कर रहें हैं बल्कि लाखों की उधारी के बाद गायब हो जा रहें हैं। पिछले लॉक डाउन में देहरादून में अनेक पेंटर और शीशे के काम करने वाले बिजनौरी, बिहारी, मुसलमान ठेकेदारों ने पेंट और काँच का काम करने वालों से यह बोलकर उधारी की थी कि, काम होते ही पूरा पैसा लौटा देंगे। लेकिन अधिकांश लोग उसके बाद गायब हो गए। ऐसे कई दुकानदार हैं जिन्होंने "पहाड़ समीक्षा" को इस प्रकार की बातें बताई हैं।


आज उत्तराखंड की मलिन बस्तियों में करीब 11 लाख लोग रहते हैं। इनका वोट बैंक देखते हुए राजनीतिक पार्टियों के लिए यह हमेशा ही बड़ा चुनावी मुद्दा भी रहा है। वर्ष 2018 में भी जब हाईकोर्ट ने बस्तियों को लेकर आदेश जारी किया था तो कांग्रेस सरकार इनके बचाव में उतर आई थी। स्थिति यह है कि आज न शहरों में नदी की जगह सुरक्षित बची और न नालों की। लेकिन राजनीतिक दलों को अपनी रोटियां सेकनी हैं, इसलिए अब प्रदेश भाजपा भी वोट बैंक के चक्कर में इन अवैध बस्तियों के बचाव में उतर आई है। 2016 से पहले बनीं अवैध व मलिन बस्तियों को बचाने के लिए राज्य सरकार विधेयक लाने जा रही है। विधानसभा के मानसून सत्र में यह विधेयक लाया जाएगा।

एक तरफ राज्य का नागरी भूकानून मांग रहा है तो उस पर भाजपा कमेटी बनाकर मामले को दबाना चाहती है। क्योंकि भाजपा ने खुद प्रदेश का भूकानून खत्म किया है। पहले 2002में, फिर 2007 में और फिर 2018 में संसोधन कर भूकानून को खत्म करने वाली भाजपा अब दूसरे राज्यों के चोर, उचक्के, आपराधिक प्रवृति को बसाने का काम कर रही है। एक तरफ प्रदेश भाजपा जनहित का दावा करती है दूसरी तरफ उत्तराखंड के मूल नागरिकों के अधिकारों का हनन करती है। उत्तराखंड क्या कोई धर्मशाला है कि कोई भी आके कहीं पर तम्बू गाड़ दे और सरकार उसको हटाने की जगह बचाव में उतर जाए। शर्म आनी चाहिए ऐसी राजनीति और राजनेताओं को।