पिंडर नदी के जल स्तर से शुरू हुआ भूमि कटान, खतरे में आई आवासीय बस्ती। सुरक्षा दीवार की मांग कर रहे ग्रामीण।

पिंडर नदी जो कि पिण्डरी ग्लेशियर (बागेश्वर) से नकल कर कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी में मिल जाती है। इस नदी के रास्ते में पड़ने वाली आवासीय बस्तियों में भूकटाव की खबरें आज कल सुर्खियों में हैं। दरअसल, सिमली में विद्यापीठ, बगड़ व शिशु मंदिर के आसपास पिंडर नदी के वेग से कटाव हो रहा है। लोगों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से यहां तटबंध और सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे हैं। पिंडर नदी अधिक बरसात के कारण उफान पर है, सिमली क्षेत्र में नदी ढलान पर बहती है इसलिए यहां नदी का वेग कई गुना बढ़ जाता है। अब क्योंकि पहाड़ो पर बरसात अधिक हो रही है इसलिए नदी का व्यास भी बढ़ गया है जिस कारण भूकटाव अधिक हो रहा है।


लगातार हो रही बरसात से शिशु मंदिर, बगड़ आवासीय बस्ती व औद्योगिक क्षेत्र के नीचे पिंडर नदी से लगातार कटाव हो रहा है। इसी क्षेत्र में सात साल पहले आई बाढ़ में सुरक्षा दीवार व तटबंध बह गए थे, उसके बाद क्षेत्र वासियों ने कई बार अधिकारियों से कहा गया, लेकिन सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर सिंचाई विभाग कर्णप्रयाग के अधिशासी अभियंता मोहन बुटोला ने कहा कि सुरक्षा दीवार व चेकडैम का आकलन कर जल्द शासन को भेजा जाएगा।  स्वीकृति के बाद सुरक्षा दीवार बना दी जाएगी।

फिलहाल स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। जो पिंडर नदी के जल स्तर पर नजर बनाये हुए है। हालांकि वर्तमान में सभी बताए गये क्षेत्र पिंडर नदी के जल स्तर से सुरक्षित दूरी पर हैं लेकिन अगर इसी तरह से भूकटाव होता रहा और आए साल इसी प्रकार बरसात से नदी का जल स्तर बढ़ता रहा तो आने वाले आठ से दस सालों में आवासीय बस्ती पूरी तरह से खतरे की जद में होगी।