मंगलवार को केदारनाथ में फिर हुआ प्रदेश सरकार का विरोध प्रदर्शन। तीर्थ पुरोहितों में फूट डालने की कोशिश में भाजपा सरकार, लगा आरोप।

प्रदेश भाजपा ने हाल ही बयान दिया था कि वे देवस्थानम बोर्ड में संशोधन को लेकर तैयार हैं। उसके बाद कांग्रेस के नए पार्टी अध्यक्ष गणेश गोदियाल का बयान आया कि हमारी सरकार आई तो देवस्थानम बोर्ड पूरी तरह से खत्म होगा। अब आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा बने कर्नल कोठियाल ने भी देवस्थानम बोर्ड को तत्काल भंग करने की बात कही है। देवस्थानम बोर्ड अब राजनीतिक रंग में रंग चुका है। अगर प्रदेश भाजपा सरकार समय रहते नहीं सम्भली तो इसके परिणाम चुनाव में देखने को अवश्य मिलेंगे। हालांकि 2022 चुनाव से पहले इस पर भाजपा अवश्य अंकुश लगाएगी ये बात 100% तय है। सूत्रों की माने तो प्रदेश भाजपा सरकार ये सब केंद्र के इशारों पर सोच समझ के कर रही है। लेकिन अब हर दिन तीर्थ पुरोहित उग्र होते जा रहे हैं।


मंगलवार को केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में तीर्थपुरोहित मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद आंदोलनकारियों ने मंदिर परिसर से मंदिर मार्ग होते हुए एमआई-26 हेलीपैड तक प्रदर्शन भी किया। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से सरकार से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की जा रही है लेकिन आंदोलन की अनदेखी हो रही है, जो उचित नहीं है। उन्होंने सरकार पर देवस्थानम बोर्ड के नाम पर तीर्थपुरोहित समाज में फूट डालने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

हालांकि विशेष सूत्रों का कहना है कि भाजपा देवस्थानम बोर्ड को लेकर प्लान बी तैयार कर रही है। शायद यही वजह है कि आज फूट जैसे शब्द का इस्तेमाल हुआ है। खैर, देवस्थानम बोर्ड के विवादों में आने से प्रदेश भाजपा को कम से कम अन्य मुद्दों से राहत तो मिल गई। भाजपा के दो दो विधायक यौन उत्पीड़न के दोषी हैं, ऐसे में लोगों का ध्यान नेताओं के चरित्र से ज्यादा किसी और बात पर केंद्रित रहे और कोर्ट से समय मिलता रहे, इससे ज्यादा पार्टी को क्या चाहिए।