उत्तराखंड राजनीति में भाजपा की पूर्व जीत माथे चढ़कर नाच रही है, तो इधर कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा की नीतियों से परेशान लोग इस बार कांग्रेस की सत्ता में वापसी करवाएंगे। लेकिन, इन सब के बीच कुछ ऐसा भी चल रहा है जो मध्यस्था बनाये हुए है और दोनों ही पार्टियों के लिए बहस का विषय बने हुए हैं। ऐसे नेताओं में हरक सिंह नम्बर एक पर हैं। बीजेपी के अंदर ही अब बागियों के खिलाफ स्वर मुखर होने लगे हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हल्के फुल्के सूखे पत्ते चुनावी बयार में इधर-उधर उड़ते रहते हैं। सरकार को दबाव में नहीं आना चाहिए। त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान का जवाब सियासी चर्चाओं का केंद्र बने हरक सिंह रावत की ओर से आया है।

पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए मंत्री हरक सिंह रावत के बीच पूरे कार्यकाल में छत्तीस का आंकड़ा रहा है। अब जब हरक के एक बार फिर कांग्रेस (Congress) में जाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा तो त्रिवेंद्र रावत ने भी आग में घी डालने से पीछे नहीं रहे। रावत ने कहा कि चुनावी बयार में हल्के फुल्के सूखे पत्ते इधर-उधर उड़ते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बागियों को अब मौका मिला तो उन्होंने बोलना शुरू कर दिया, उनको लगता है कि इस समय अच्छा मौका है कुछ ना कुछ लाभ मिल जाएगा।

अब हरक तो ठहरे हरक, तो ऐसे में वह कहा चुप बैठने वाले थे। लगे हाथ उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दे डाली। हरक सिंह रावत ने कहा कि कुछ लोग भाग्य की खाते हैं और कुछ लोग मेहनत की। हमने ज्यादा खोदा पानी कम मिला, कुछ लेागों ने कम खोदा लेकिन उनको ज्यादा पानी मिल गया। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत 2002 में विधायक बने तीसरी बार में सीएम बन गए और हम विधायक के विधायक ही रह गए।

दरअसल, हरक सिंह कांग्रेस से इसी उम्मीद में बाहर भी गए थे कि शायद इधर जाकर कुर्शी पर बैठने का सौभाग्य मिल जाए। लेकिन दो बार उम्मीद जगी भी तो एका एक अंधेरा हो गया। एक बार तीरथ और दूसरी बार धामी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। ऐसे में हरक चुप भी रहें तो कैसे? एक-दो बार के विधायक भी मुख्यमंत्री हो गए और जैसा कि जनाब हरक कह रहें कि जीवन भर खोदते ही रह गए।