उत्तराखंड के राजनीतिक समीकरण आज कल बड़ी तेजी से बदल रहे हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे की कांग्रेस में वापसी के बाद भाजपा में दलबदल की चर्चाएं थम नहीं रहीं हैं। इन कयासबाजियों से प्रदेश संगठन खासा असहज है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने इन अटकलों पर पूर्ण विराम लगाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा को मैदान में उतारा है। बहुगुणा कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के घर पहुंचे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल भी वहां पहुंचे। बहुगुणा ने कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए सभी विधायकों व नेताओं से बारी-बारी बात की। 

गौरतलब है कि भाजपा ने प्रदेश के वोटरों को रिझाने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। किसी को मानदेय देकर तो किसी को वेतन में बढोत्तरी देकर और युवाओं को रोजगार का सपना दिखाकर वोटर को भाजपा की तरफ लुभाने की कोशिश की है। ऐसे में अगर भाजपा से विधायक कांग्रेस या अन्य पार्टियों की तरफ आते हैं तो यह खबर प्रदेश भाजपा के लिए अच्छी नही है। इस बात की चिंता अब अलाकमान को भी सताने लगी है इसलिए वर्षो तक उपेक्षित रहे विजय बहुगुणा की याद आई और उनको दिल्ली से उत्तराखंड भेजा गया। 

विजय बहुगुणा ने जो मीडिया वार्ता में कहा कि हमने कांग्रेस से विभाजन सिद्धांतों के आधार पर किया था। आज हम सभी साथ हैं और पूरी तरह से समर्पित हैं। बहुगुणा ने कहा कि हमारा आज भी यह मानना है कि उत्तराखंड का हित और विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित है। अब विजय बहुगुणा को किस प्रलोभन के साथ भेजा गया ये तो वही जाने, लेकिन जब राज्य हित में राज्य के नेता ही नही है तो प्रधानमंत्री कैसे है ये तो विजय बहुगुणा जी ही जाने।