उत्तराखंड में कोरोना के अब 174 सक्रिय मरीज हैं। अल्मोड़ा में आठ, बागेश्वर में 2, चमोली में 2, चंपावत में 8, देहरादून में 42, हरिद्वार में 24, नैनीताल में 61, पिथौरागढ़ में 2, पौड़ी में 21, रुद्रप्रयाग में 2, यूएसनगर में 1 और उत्तरकाशी में 1 एक्टिव मरीज है। संक्रमण दर 0.06 प्रतिशत है।

उत्तराखंड में गुरुवार को कोरोना के 09 नए मरीज मिले। 26 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया गया, जिससे एक्टिव मरीजों की संख्या 174 रह गई। 15 हजार सैंपलों की रिपोर्ट आई। गुरुवार को देहरादून में 5, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और उत्तरकाशी में एक-एक मरीज में कोरोना की पुष्टि हुई।


दून मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेंसिंग के दूसरे बैच की भी रिपोर्ट आ गई। इसमें नये वेरिएंट की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, चिंता की बात है कि सभी सैंपलों में डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट मिला है। पहले बैच में 18 सैंपलों की रिपोर्ट के बाद अब दूसरे बैच के 80 सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है। इसमें कोरोना का कोई नया वेरिएंट नहीं मिला, पर अभी भी सजग रहने की जरूरत है। दूसरे बैच में नैनीताल के 35, हरिद्वार के 01, टिहरी के 02, अल्मोड़ा के 05 और देहरादून के 37 सैंपल थे। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. शेखर पाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार दहिया की अगुवाई में वॉयरोलॉजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की गई थी।


दून मेडिकल कॉलेज की वीआरडीएल लैब के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. शेखर पाल और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील दहिया ने बताया कि जीनोम सिक्वेंसिंग की एक प्रक्रिया में चार दिन लगते हैं। यह किसी वायरस का प्रोफाइल होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह का दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से ही मिलती है। इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सिक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में जानकारी मिलती है। 20 या 80 सैंपलों की चिप लगाकर जांच की जाती है।