पार्टी सूत्रों के अनुसार हरीश रावत ने चुनावी रणनीति के संचालन में उनके पैर खींचे जाने को लेकर अपनी जो खीज जाहिर की है उसका सीधा निशाना कांग्रेस हाईकमान विशेषकर पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर है। राहुल के करीबी माने जाने वाले नई पीढ़ी के नेता देवेंद्र यादव उत्तराखंड के प्रभारी हैं और सूबे में हाल के दिनों में कई ऐसे लोगों को चुनाव से लेकर संगठन में नियुक्ति करायी हे जो हरीश रावत के विरोधी रहे हैं।

उत्तराखंड के सीएम ने लंबे टवीट की अपनी श्रृंखला के इस अंश में सीधे तौर देवेंद्र यादव को निशाना बनाते हुए राहुल गांधी की सूबे की चुनावी रणनीति पर परोक्ष सवाल उठाते हुए साफ कर दिया कि चुनाव में सहयोग करने की बजाय उनके पांव खींचे जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि हरीश रावत सूबे में चुनावी रणनीति को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं और इसी वजह से प्रदेश कांग्रेस तथा कुछ जिलों में हुई अध्यक्षों की नियुक्ति उनकी पसंद से नहीं की गई है। इसके उलट नियुक्त किए गए लोगों में अधिकांश रावत के विरोधी खेमे नेता विपक्ष प्रीतम सिंह के समर्थक माने जाते हें।

हालांकि, हाईकमान ने चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाते हुए हरीश रावत को सूबे का चुनावी जिम्मा सौंप दिया था और उनकी पसंद से ही गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन चुनाव निकट आने को देखते हुए रावत अब इस बात के लिए हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं कि कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि टिकट बंटवारे में भी उनका वर्चस्व बना रहे और पार्टी में यह बात छिपी नहीं रह गई कि देवेंद्र यादव इस कोशिश में जुटे हैं कि कांग्रेस का सब कुछ रावत के इर्द-गिर्द होकर ही सीमित न रह जाए।